बुधवार, 5 सितंबर 2012

             
         आपका
देवेन्द्र पाण्डेय "डब्बू जी "
     










     











   

रविवार, 6 मई 2012

    भटके हुए राही को मंजिल मिल ही जाती है
गुमराह तो वो  है जो घरो से निकलते ही नहीं


लीक लीक गाड़ी चले लीकय चले  कपूत
लीक छोड़ तीनो चले
सायर सिंह सपूत

दिल में जो जख्म है
ओ सब फूलो के गुच्छे है
हमको पागल ही रहने दो
हम पागल ही अच्छे  है


संघर्षो के साए में असली
आजादी पलती है
इतिहास धर मुड़ जाता है
जिस और जवानी चलती है

     आपका
देवेन्द्र पाण्डेय "डब्बू जी "

शुक्रवार, 4 मई 2012

     
नाथू राम बिनायक गोडसे
महान थे यदि  ये  गाँधी को
गोली नहीं मरते तो
आज़ादी के साथ ही
 
सम्पूर्ण भारत
गुलाम हो जाता क्यू  की
गाँधी मुस्लिम हीतैसी  थे
और नेहरु सत्ता लोभी फिर
सच्चा हिन्दू क्या करता
नाथूराम ने जो किया क्या गलत था ...
सोचो हिन्दुओ सोचो ..
हिन्दू कायर नहीं सपूत था.है.और रहेगा
जयहिंद वंदेमातरम जयहिंद


भारत का बट्बारा एक मुस्लिम रास्ट्र
की जिद पे हुआ तो दूसरा हिन्दू रास्ट्र
बनाना चाहिय था परन्तु दुखद
एक मुस्लिम और दूसरा
सर्व धर्म सराय बनगया
क्यों ..........................
उससे भी दुखद दोनों देसों के प्रथम
प्रधान मंत्री मुसलमान ही हुए
पकिस्तान में जिन्ना
भारत में गयासुद्दीन गाजी का
पोता 'यानी नेहरु'
आखीर कबतक हिन्दू ठगा जाता रहेगा
कबतक सोचो कबतक ........................


    आपका
देवेन्द्र पाण्डेय "डब्बू जी "

रविवार, 13 नवंबर 2011

को कुतुव  मीनार का नाम दिया 
राजधानी में विष्णु  ध्वज की दुर्दशा को देखने और उसके साबुत को ढूढ़ने  की जरुरत नहीं ,यहाँ भारत सरकार की लगी पट्टिका में साफ़ साफ़ लिखा है की माकलुक बंसी सुल्तान क़ुतुबुद्दीन  ऐवक ने 27 हिन्दू और जैनियों के मंदिरों को तोड़ कर इस  1193से 1197 के बीच ध्वज का इस्लामी करण  किया था ,और इसको कुतुवमिनार का नाम दिया था ,इसी परिसद में विजय स्तम्भ जो की चौथी शताव्दी का ,पूरी दुनिया में जंग ना लगने के लिए प्रसिद्ध यही स्थापित है ,जिससे यह भूमि और धरोहर हिन्दुओ के आस्था की होने की पुष्टि होती है ,जब लुटेरे आता ताई भारत में नहीं रहे फिर हिन्दू धरोहरे फिर भय बस अभी भी गुलामी की जंजीरों में जकड़ी है  .....?