देश के भीतर न लोगो कि सोच पिछड़ी है न ही देश हित कि भावनाए पिछड़ी है पिछड़ा पन तो नेताओ कि राजनैतिक सोच का परिणाम है जिस कारण समाज में एक बड़ा भेद खड़ा करदिया गया है अब सभी पार्टिया उसी जाती का उमीदबार चुनावी मैदान में उतारती है जिस जाती के लोगो की संख्या उस छेत्र में ज्यादा होती है आखिर ऐसा क्यू क्या ऐसे निर्णय से समाज बाद बढ़ेगा या देश समाज कमजोर होगा जब हिन्दू महासभा हिन्दू बाद कि बात करती है तो देश भर के नेताओ कि तवियत खराब हो जाती है कि हिन्दू महासभा सैकुलर नहीं है और ये अपने आचरण नहीं देखते जो हिन्दुओ को गोत्रो में बताने का घिनौना काम करते है हिन्दू जागो रे जागो
रविवार, 10 नवंबर 2013
शनिवार, 9 नवंबर 2013
पूरी दुनिया में भारत सर्व धर्म सराय के रूप में विख्यात है यहाँ सभी नेताओ को सत्ता सुखो हेतु अपने स्वार्थो कि गुलामी से ऊपर उठा कर सोचने कि फुर्सत नहीं न ही सोचने कि छमता ही है तभी तो बंगला देसी घुसपैठी देश में बोटर बन रहे है और हु आ हु आ सियारो जैसे एक स्वर में सभी नेता नाद करने के बाद उन घुसपैठियो कि चरण वंदना में जुड़ जाते है जिनका इस देश सो न कोई लगाव है न वो इस देश के शुभ चिंतक ही है शैक्कुलर राजनीती के नाम पर देश कि दुर्दशा करने कि होड़ में कांग्रेस भाजपा सपा बसपा सभी एक से बढ़ कर एक है ये महारथी देश को कहा जे जा रहे है इसकी खबर शायद इनको भी नहीं देश स्वार्थो से नहीं बलिदान और कुर्वानी से चलता है तो क्या आज के नेताओ में ये गुण है यदि है तो उसका असर क्यू नहीं है यदि नहीं है तो ये देश का नेतत्व करने कि बाते क्यू करते है यह सवाल देश हित में हर व्यक्ति को हर नेता से करना होगा क्यू कि ये देश किसी एक का नहीं सभी का है फिर देश कि दुर्दशा में हम अपनी मौन सहमति क्यू दे।
शुक्रवार, 8 नवंबर 2013
सम्बैधानिक सत्यता की स्वीकारोक्ति पर देश के किसी राजनैतिक पार्टी नेता में हिम्मत नहीं कि उसका सम्मान करे और पालन करे । 5 % से कम जनसंख्या बाली जातिया अल्प संख्याक का दर्ज़ा पा सक्ती है। ……… फिर देश के भीतर 20 करोड़ कि जनसंख्या पार कर चुका मुसलमान आज भी अल्प संख्याक है क्यू। बीजेपी बसपा कॉंग्रेस सब ने मिल कर मुलायम सिंह कि बहू अखिलेश यादव कि पत्नी के खिलाफ लोकसभा में अपने उम्मीद बार नहीं खड़े किये क्यू। आज़म खान ने 302 के मुजरिमो को थाने से छुड़ाया। शफ़ीकुर्रहमान बसपा सांसद ने वंदेमातरम का अपमान किया और देश के सभी नेता मौन रहे क्यू। अपने अपने स्वार्थो कि सिद्धि हेतु ये सारे के सारे एक हो जाते है मुस्लिम बोटो के लोभी देश को गुलाम बना रहे है और हिन्दू आज भी खामोश है आखिर कबतक और क्यू !
गुरुवार, 7 नवंबर 2013
कभी विवेकानन्द जी की तुलना दाउद से कि जाती है कभी विवेकानन्द जी को आदर्श मन जाता है। कभी राम मन्दिर बनाने कि बात कि जाती है कभी राम के अस्तित्व को नाकारा जाता है कभी हिन्दू बादी होने का आडम्बर है तो कभी मुस्लिम तुस्टी कारण का खेल खेला जाता है। .......... धन्य है गिरगिट कि तरह रंग बदलने बाकि भाजपा धन्य है तेरी सत्ता लोलुप्ता की चाल बोटो कि खातिर तुझको हर सौदा मंजूर है फिर उसकी कीमत चाहे हिन्दुओ कि अनगिनत लासे ही क्यू न हो।
बुधवार, 6 नवंबर 2013
राजनीती व्यापार बनगई है पैसे से बोट खरीद कर समाज सेवा करने का दम भरने बालो से देश कि जनता को साबधान रहना होगा देश राजनीति का गुलाम बन गया है देश के भीतर किसी भी पार्टी नेता में रास्ट्र नीति का अंश मात्र भी दिखायी नहीं देता जो देश के लिए खतरनाक है हिन्दुओ संगठित हो न बहको न किसी को बहकाओ हिन्दू बादी हिन्दू महासभा में जुड़ कर देश का और अपना मान बढ़ाओ हिन्दू जागो रे जागो
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