कितना कस्ट होता है भाजपा और आर एस एस को जब हिन्दू अपने धर्म रक्षा की बात करता है ! इनको देख कर तो गिरगिट भी अपना रंग बदलना भूल जाये !सत्ता में आने से पहले जिस गाय की आरती उतारते थे अब उसकी हत्या पर रोक के बेहूदे बयान देकर ये खुद के हिन्दू होने पर संदेही सावित हो रहे है ! देश गऊ माता के क़त्ल को बंद करने की बात करता है तो भाजपा के महासचिव राम माधव लोगो को यह बताते है की अरव जहा इस्लाम का जन्म हुआ बहा ऊट होते है गाय नहीं ! तो परम आदर्णीय भाजपा और आर एस एस को यह समझ में क्यों नहीं आता की वो भारत के भीतर सरकार की सहमति से देश भर में कटाने बलि गायो की बात है जिसे बंद करने की इनमे हिम्मत नहीं ! देश के साथ खिलबाड़ और हिन्दुत्व के अपमान की जो परंपरा इन्होने डाली है बाह निंदनीय है !ये बही राम माधव है जिन्होने कभी कहा था हिन्दू माने चोर कला और लुटेरा ! हमने इस बात का इन्हे करारा जवाब दिया था ! गऊ हत्या को आदर्श मानाने बाले हिन्दुओ का dna होना जरुरी है ! ऐसा सत्ता लोभ ऐसी ओछी सोच बाले बयानों से हिन्दुओ को दुःख हुआ भाजपा और आर एस एस को राम माधव के बयान पर माफ़ी मांगनी चाहिए !
मंगलवार, 27 अक्टूबर 2015
सोमवार, 3 अगस्त 2015
हिन्दू खुद को हिन्दू कह कर अब न तो स्वयं में गर्व महसूस करेगा नहीं उसे देवालय में पूजा अर्चना की इजाजत ही होगी...... ? इस बात को भोजशाला के गर्भ गृह में हवन पूजन में बिघ्न पैदा कर हिन्दुओ की हड्डियां चकनाचूर करने बलि भाजपा सरकार ने पूर्णताः सिद्ध करदिया था ! उसमे बची कुची कसर को आज पूरा कर दिया गया ! जब हिन्दू महासभा के सांस्कारिक लोगो को जो सावन के प्रथम सोमबार को कशी विशवनाथ में जलाभिषेकः ( पूर्व नियोजित कार्यक्रम ) करने के पहले ही उत्तर प्रदेश सरकार ने बंदी बना लिया हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष कमलेश तिवारी सहित सैकड़ो हिन्दू महासभाइयो शिव भक्तो का अपराध क्या हिन्दू होना , शिव के जलाभिषेकःकी तैयारी करना या सरकार की चाटुकारिता न करना है , उत्तर प्रदेश सरकार को इस बात को स्पस्ट करना चाहिए ! हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा की मध्य प्रदेश ,छत्तिसगढ़ ,राजस्थान,ग़ुजरात,महाराष्ट्र से आये हिन्दू महासभा के शालीन कर्यकर्ताओ ने भीड़ में शामिल हो अपनी पहचान छुपाते हुए विशवनाथ में जलाभिषेकःकिया ! हमारा मकसद शोर सरावा करना नहीं बल्कि अपने लक्ष्य को किसी भी तरह पूरा करना था ! हमारे कुछ साथियो की गिरफ़्तारी से हमारे मकसद अब प्रभित होने बाले नहीं !क्यों की अब हमभी ऐसी सरकारों को चकमा देना सीख गए है, जो पूर्णतः हिन्दू बिरोधी है!
शुक्रवार, 31 जुलाई 2015
तुम जिओ हजारो साल साथियो मै तो मरने को ही जन्मा हू ,
अब्दुल कलाम जी के योगदान से भारत गौरव महसूस कर रहा है ,ऐसे सपूत किसी जाती धर्म के नहीं बल्कि राष्ट्र के होते है ! परन्तु जातीबादी उन्माद में ऐसे पुरुष के महत्व के नज़ारे चिन्तनीय है ! जब कलाम साहब को अंतिम बिदाई देने किलो मीटरों की कतार में खड़े भारतीय सिसक रहे थे ! तब यकूव मेनन जैसे दुर्दान्त आतंकी की मौत का मातम मानते मुसलमान यह क्यू भूल गए की मुंबई बमब्लास्ट में सिर्फ हिन्दू भर नहीं मुसलमान ईशाई बौद्धया अर्थात इंसान का लहू बहा था ! न्यायलय ने जिसे अपराधी घोषित किया उसे नेक इंसान कहकर उसके सव यात्रा में शामिल लाखो की संख्या बाला समुदाय आखिर क्या सिद्ध करना चाहता है !
यह हिन्दू भर नहीं सम्पूर्ण भारतीयों के लिए चिंतन की बात है के भारत रत्न बाले कलाम को श्रद्धांजलि देनी की जरुरत उन्हों महसूस नहीं हुई जो यकूव मेनन की मौत में ग़मगीन थे ! अर्थात आतंकी पूजन की प्रथा बाला समाज अब चिन्तनीय है ! हिन्दू जागो रे जागो
अब्दुल कलाम जी के योगदान से भारत गौरव महसूस कर रहा है ,ऐसे सपूत किसी जाती धर्म के नहीं बल्कि राष्ट्र के होते है ! परन्तु जातीबादी उन्माद में ऐसे पुरुष के महत्व के नज़ारे चिन्तनीय है ! जब कलाम साहब को अंतिम बिदाई देने किलो मीटरों की कतार में खड़े भारतीय सिसक रहे थे ! तब यकूव मेनन जैसे दुर्दान्त आतंकी की मौत का मातम मानते मुसलमान यह क्यू भूल गए की मुंबई बमब्लास्ट में सिर्फ हिन्दू भर नहीं मुसलमान ईशाई बौद्धया अर्थात इंसान का लहू बहा था ! न्यायलय ने जिसे अपराधी घोषित किया उसे नेक इंसान कहकर उसके सव यात्रा में शामिल लाखो की संख्या बाला समुदाय आखिर क्या सिद्ध करना चाहता है !
यह हिन्दू भर नहीं सम्पूर्ण भारतीयों के लिए चिंतन की बात है के भारत रत्न बाले कलाम को श्रद्धांजलि देनी की जरुरत उन्हों महसूस नहीं हुई जो यकूव मेनन की मौत में ग़मगीन थे ! अर्थात आतंकी पूजन की प्रथा बाला समाज अब चिन्तनीय है ! हिन्दू जागो रे जागो
सोमवार, 11 मई 2015
अन्धा बांटे रेबड़ी चीन्ह चीन्ह कर दे ..... बाप रे बाप कोर्ट के आदेश की अबमानना समझो कोर्ट ऑफ़ कंटेम्ट का भय लोगो को न्यायालय के सम्मान हेतु मजबूर करदेता था. ये तब की बात थी जब न्याय में नैतिकता दिखती थी परन्तु जब न्याय का व्यापार होरहा हो.न्यायालय के फैसले जातिगत आधार पर होरहे हो .न्यायपालिका की अपने फैसले की सत्यता और असत्यता की कोई जुम्मेदारी न हो. आम जानो को ये लगने लगे की अत्याचार सहलेना ज्यादा सस्ता है न्यायालय के पीसने से. तो विचारणीय हो जाता है की देश में कितनी दादागिरी है न्यायपालिका की और कितना अविश्बास है न्यायाधीशों के प्रति. यदि यही हाल रहे तो न्यायिक प्रक्रिया से त्रस्त तबका हथियार उठाकर अपने सम्मान सम्पत्ति की रक्षा हेतु विबस हो जायेगा तब क्या होगा जब हर फैशला फरियादी की बन्दूक करेगी. क्या यह चिन्तनीय नहीं है. क्या न्याय में समानता सहजता सत्यता तत्परता को लागू करने की जरुरत नहीं है .क्या न्याय सब के लिए सुलभ हो इस ओऱ प्रयास नहीं होना चाहिए. क्या देश के दमन हेतु बनाये अंग्रेजो के कानून को समाप्त कर भारत के अनुरूप संबिधान का निर्माण नहीं होना चाहिए. यदि इसकी जरुरत है तो ख़ामोशी तोड़ो नाद करो हिन्दू राष्ट्र बनाने का . हिन्दू जागो रे जागो
सोमवार, 4 मई 2015
एक टिटिहरी ( चिड़िया ) थी जो ऊँचे ऊँचे आसमानो में उड़ाती और दूसरी चिडिओ को हेय दृस्टि से देखती थी उस घमण्डी टिटिहरी को अपने बच्चो की भी परबाह नहीं होती दिन भर आवारा गर्दी करने के बाद रात में जब बच्चो के पास पहुचती तो बच्चे भूख प्यास से तड़फ रहे होते जब वो अपनी माँ से पूछते की दाना पानी कहा है तुम तो खाली हाँथ लौट आई जब की बोल के गई थी की जल्दी ही अच्छे पकवान लाओगी हम सब मजे से दावत उड़ायेंगे तो टिटिहरी बड़ी बेशर्मी और दृढ़ता के साथ अपनी चोंच अपने पँख में छुपा कर टिया टिया करते हुए अपने पैरो को ऊपर आसमान की और उठा कर कहती है की ये जो ऊपर आसमान देखते हो न उसको हमने ही अपने पंजो से थाम रक्खा है वरना ये निचे गिरजायेगा और दुनिया खत्म हो जाएगी बच्चे अपनी महान टिटिहरी माँ की ऒर गर्व से देखते गर्मी ठण्डी बरसात में अपनी माँ के द्वारा उठाये गए आसमान के निचे अपना जीवन यापन करते और विरासत में मिली सीख और परम्परा को आगे बढ़ाने खुद को तैयार करने में लगजाते ऐसी थोथी परम्परा को थोपने बाली टिटिहरी से किसका भला होगा ये तो टिटिहरी ही जाने !
शुक्रवार, 1 मई 2015
जंगल में शेर का बहोत आतंक था सरे जानवर परेशान थे सबने संगोष्ठी की और और शेर से मिलने की प्लानिंग हुई निर्धारित समय पर सबने शेर से मुलायत की और बदलते हुए बाताबरण की बात करते हुए प्रजातंत्र प्रणाली अर्थात चुनाव हेतु शेर को मनालिया गया चुनाव की घोषणा हुई शेर के खिलाफ कोई परचा भरने को तैयार न हुआ तो बहोत दिनों से किट किट करता उछाल कूद से सब का ध्यान अपनी और आकर्षित करने बाले बन्दर ने कहा मै शेर की दादागिरी खत्म करुग जंगल में अब कोई भी जानबर डरेगा नहीं न किसी का शिकार ही किया जायेगा सब को घर सबको खाना सबको पानी उपलब्ध कराया जयेगा यह सुन सबने खूब तालिया पिटी मंकी दादा विकिश पुरुष के रूप में प्रचारित हुए और चुनावो में बहुमत से विजयी हुए उनकी सेवा में सेवक रोज फल लेकर पहुँचजाते हाथी भालू घोड़े सभी मंकी शासन का गुड़गान करने में लगे रहते परन्तु परिवर्तन कही दिखाई नहीं दे रहा था बही अराजकता बही आतंक यथाबत बना हुआ था फरियादी परेशान थे कब अच्छे दिन आयेगे किसी की समझ नहीं आ रहा था शेर का जब मन होता अपना शिकार करता बल्कि अपनी पराजय से नाराज होने के कारण जानवरो का अपने भोजन की जरुरत से ज्यादा मार देता था ! सारे जंगल में दहसत का बातावरण था पडोसी जंगली जब मन होता आते शिकार करते और लौट जाते कही भी कोई सुरक्षित नहीं था न ही कोई व्यबस्था थी इस अत्याचार की कही सुनबाई न थी तो सभी जंगल बासी इकट्ठे होकर मंकी राजा के पास गए हालत न सुधरने की दसा में जंगल छोड़ जाने या आत्महत्या करलेने की धमकी दी तो मंकी राजा को गुस्सा आगया उसने शेर को ललकारा सब को लगा आज शेर की खैर नहीं आगे आगे मंकी चले पीछे हाथी घोडा भालू गधे सब शेर के माद की और चल पडे करीब पहुंच कर मंकी जी ने शेर को फिर ललकारा दन्त किट किटा कर शेर को माद से बहार निकलने को कहा शेर ने माद से निकलते हुए दहाड़ तो मंकी राजा पेड़ में चढगए गुस्साए शेर ने सैकड़ो जानवरो को मौत के घाट उतार दिया मंकी कभी इस पेड़ कभी उस डाली में उछाल कूद करता रहा ! निरीह निर्दोष जानवर चीखते रहे और मंकी महराज शेर को मर देने की धमकी देते दनादन उछाल कूद में लगे रहे अब ने निरन्तर घटने बाली घटना होगी जब जब राज दरबार सजता तब तब मंकी महराज से लोगो की शिकायत करते रोज रोज की शिकायत से दुःखी मंकी जी ने बड़े गम्भीर उद्वोधन में सभी को समझते हुए कहा मै तुम सब का राजा हु तुम्हारा दुःख हमारा दुःख है तुमने हमें पांच वर्षो के लिए चुना है तुम सब की भलाई के लिए भागना कोशिश करना हमारा कर्त्तव्य है उसे हमने पूरी ईमानदारी से निभाया खूब चीखा चिल्लाया एक पेड़ से दूसरे दूसरे से तीसरे पेड़ दर पेड़ डाली दर डाली पडोसी जंगल दर जंगल दौड़ता ही रहा हू अंगे भी ऐसे ही दौड़ता रहूँगा ये मेरा बादा है मै शेर मुक्त दहसत मुक्त संपन्न जंगल देने के लिए प्रयाश रत हु यह सुन कर सबने तालिया पीटी मंकी जी के कोशिश की खूब सराहना हुई मंकी जी जिन्दाबाद जिन्दाबाद जिन्दाबाद ! लेकिन ये किसी ने न जाना की मंकी जी सरे जंगल गिरवी रखने की योजना में मसगुल है और इस अभियान में जंगल के मिडिया प्रभारी सहित अधिक तर जानवर स्वार्थी होगये जंगल का अस्तित्व धीरे धीरे समाप्ति की और है फिर भी मंकी महाराज जिन्दाबाद ही है !
सोमवार, 20 अप्रैल 2015
हे परशुराम धरो अवतार
फिर जागो जग में एक बार
हे ओस बूँद के कोमल हार - जग जननी के प्रथम लाल
जीव जगत तुम ॐ माद - स्वाश धरा की प्रथम नाद !!
सृष्टि सृजन के कपाल काल - बसन्धुरा के ललाट लाल
हृदय कान्ति कंचन काया - वेदनीति की निर्मल छाया !!
अमृत कलश तुम धरा धार - अनमोल निधि जग मणि हार
अदम्य शक्ति निशंक ज्ञान - प्रखर बुद्धि बूँद बिज्ञान !!
प्रथम शिखर सिरमौर पार - जग गूढ़ सागर बूँद सार
ज्ञान सैयाम छमा दान - वेद विधा जग शौर्य शान !!
हे प्रचण्ड परशु की शान्त धार
फिर जागो जग में एक बार !!
हे भूत भविष्य के पालन हार - वर्त्तमान की मौन धार
धरा धर्म के आदि अन्त - नीति जनक जग शिखर संत !!
पवन वेग के हृदय मान -परशु विधा की प्रलय शान
शीतल स्वक्ष् शिखर चाँदनी - सूरज सी अँगार आगानी !!
भरा नसों में शक्ति सार - जान्ह्वी जीवन प्रखर धार
कर्म नीति तुम मानव तंत्र - जीव जगत के बीज मन्त्र !!
धरा धर्म की मधुर तान - शिव ताण्डव के सहज गान
तृण मौन तरुण तरुणाई - तापस अम्बर सी अंगड़ाई !!
हे शास्त्र शस्त्र परमाणु सार
फिर जागो जग में एक बार !!
हे शक्ति ज्ञान की प्रखर आग - हुँकार तुम्हारी प्रलय राग
श्रष्टि प्रलय तुम्हारी सांसो में - जग सार भरा सब आँखों में !!
भूचाल पला पग बैरागी - संग्राम सजा नख अनुरागी
सिंह नाद के उदय अन्त - वेद विधा के शक्ति सन्त !!
शम्भु जटा के गूढ़ सार - जग तिमिर ताण्डव खिंच मार
जल वायु अम्बर धरा आग - जग जीव जगत तू पुनः जाग !!
कण कण गूँजे हृदय राग - देवेन्द्र स्वांश बन धार जाग
सम्मान सैयाम ऐश्वर्य अवतारी - स्वस्थ सुखी जग उपकारी !!
हे अदम्य शक्ति विशवास सार
फिर जागो जग में एक बार !!
हे दिव्या ज्ञान के प्रथम दीप - जग मग जग श्रष्टि प्रकाश
पाषाण शिखर की हृदय शीला में -अमर अँकित कर इतिहाश !!
वेद नीती जीवन साँसे बन - धरा धर्म हृदय धड़कना है
सत्य सपूत अमृत धरा बन -विशब विजयी सिरमौर चमकना है !!
देवेन्द्र मती अरु हृदय राग - शंख नाद बन धरा जाग
जीव जगत तुम प्रथम आर्य - तुम्ही आदि शंकराचार्य !!
बिज्ञान वेद गुरु द्रोण नाम - चाणक्य विप्र तुम परशुराम
रश्मी रथि अब आत्म राग -बन ज्ञान सैयाम शक्ति जाग !!
हे परशुराम धरो अवतार - फिर जागो जग में एक बार !!
हे सत्य सनातन शिव स्वरुप सरकार
जागो फिर जागो जग में एक बार !!
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