शनिवार, 6 मई 2023

          रोहिंग्याओं से देश को ख़तरा इस विषय पर चिंतन नहीं
बल्कि राजनैतिक फायदा ढूढ़ा जा रहा है ।

म्यांमार में करीब 8 लाख रोहिंग्या मुस्लिम रहते हैं और वे इस देश में सदियों से रहते आए हैं, लेकिन बर्मा के लोग और वहां की सरकार इन लोगों को अपना नागरिक नहीं मानती है। बिना किसी देश के इन रोहिंग्या लोगों को म्यांमार में भीषण दमन का सामना करना पड़ता है। बड़ी संख्या में रोहिंग्या लोग बांग्लादेश और थाईलैंड की सीमा पर स्थित शरणार्थी शिविरों में अमानवीय स्थितियों में रहने को विवश हैं। करण स्पष्ट है उनका संदेही और नरभक्षी होना -----?

आज पुनः 
रोहिंग्या मुस्लिम का इतिहास जनाने की ज़रूरत है । कॉमन ईरा (सीई) के वर्ष 1400 के आसपास ये लोग ऐसे पहले मुस्लिम्स हैं जो कि बर्मा के अराकान प्रांत में आकर बस गए थे। इनमें से बहुत से लोग 1430 में अराकान पर शासन करने वाले बौद्ध राजा नारामीखला (बर्मीज में मिन सा मुन) के राज दरबार में नौकर थे। इस राजा ने मुस्लिम सलाहकारों और दरबारियों को अपनी राजधानी में प्रश्रय दिया था। अराकान म्यांमार की पश्चिमी सीमा पर है और यह आज के बांग्लादेश (जो कि पूर्व में बंगाल का एक हिस्सा था) की सीमा के पास है। इस समय के बाद अराकान के राजाओं ने खुद को मुगल शासकों की तरह समझना शुरू किया। ये लोग अपनी सेना में मुस्लिम पदवियों का उपयोग करते थे। इनके दरबार के अधिकारियों ने नाम भी मुस्लिम शासकों के दरबारों की तर्ज पर रखे गए।  परंतु इस भरोसे के बाद भी ये रोहिंग्या मुस्लिम अपनी हरकतों से संदेही बने रहे ।

वर्ष 1785 में बर्मा बौद्ध धर्म का प्रभाव बढ़ा और वर्मा की सत्ता बौद्धों के हँथो में संरक्षित हुई । रोहिंग्या मुस्लिम अपनी हरकतों से अपने आचरण के करण आक्रामक होने लगे बौद्धों के अस्तित्व को समूल नष्ट भ्रष्ट करने और धर्म गुरूओ की हत्या जैसे इनका रोज़ की दिनचर्या बनगई थी । तब देश हित में संगठित बौद्धों रोहिंग्या मुस्लिमों को इलाके से बाहर खदेड़ दिया। इस अवधि में अराकान के करीब 35 हजार रोहिंग्या मुस्लिम बंगाल भाग गए जो कि तब अंग्रेजों के अधिकार क्षेत्र में था। वर्ष 1824 से लेकर 1826 तक चले एंग्लो-बर्मीज युद्ध के बाद 1826 में अराकान अंग्रेजों के नियंत्रण में आ गया। तब अंग्रेजों ने बंगाल के स्थानीय बंगालियों को प्रोत्साहित किया कि वे अराकान ने जनसंख्या रहित क्षेत्र में जाकर बस जाएं। रोहिंग्या मूल के मुस्लिमों और बंगालियों को प्रोत्साहित किया गया कि वे अराकान (राखिन) में बसें।

रोहिंग्या मूल के मुस्लिम सुन्नी इस्लाम को मानते हैं और धार्मिक कट्टरता के करण इनकी शिक्षा का स्तर शून्य है, ये सिर्फ़ कट्टर इस्लामिक शिक्षा की ही जानकारी रखते है यही करण है की ये किसी भी स्थिति परिस्थिति में अपनी आदत कट्टरता और हिंसक प्रविति को छोड़ नहीं पाते है । ये कठ मुल्ले दिन रात औलाद पैदा करने और हिंसा को ही अपने जीवन का उद्देश्य मानते है । यही करण है की बर्मा के शासकों और सैन्य सत्ता ने इनका कई बार दमन किया किया और इन्हें देश से बाहर खदेड़ दिया गया। ऐसी स्थिति में ये अविश्वसनीय रोहिंग्या बांग्लादेश, थाईलैंड की सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसते हैं या फिर सीमा पर ही शिविर लगाकर बने रहते हैं। 

1991-92 में दमन के दौर में करीब ढाई लाख रोहिंग्या बांग्लादेश भाग गए थे । म्यांमार की सेना ही क्या देश में लोकतंत्र की स्थापना वाली आंग सान सूकी का भी मानना है कि रोहिंग्या मुस्लिम म्यांमार के नागरिक ही नहीं हैं। जिससे स्पष्ट होता है की इन रोहिंग्या मुस्लिम का आचरण कैसा है ।

द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति और 1962 में जनरल नेविन के नेतृत्व में तख्तापलट की कार्रवाई के दौर में रोहिंग्या मुस्लिमों ने अराकान में एक अलग रोहिंग्या देश बनाने की मांग रखी, लेकिन तत्कालीन बर्मी सेना के शासन ने यांगून (पूर्व का रंगून) पर कब्जा करते ही अलगाववादी और गैर राजनीतिक दोनों ही प्रकार के रोहिंग्या लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। सैनिक शासन ने रोहिंग्या लोगों को नागरिकता देने से इनकार कर दिया और इन्हें बिना देश वाला (स्टेट लैस) बंगाली घोषित कर दिया। तब से स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। बर्मा के सैनिक शासकों ने 1982 के नागरिकता कानून के आधार पर उनसे नागरिकों के  केवल दो बच्चे पैदा करने के नियम को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया, लेकिन उन्होंने इसका संसद में विरोध करने की जरूरत नहीं समझी।

रोहिंग्या के आचरण का अंदाज़ा सिर्फ़ इसी बात से लगाया जा सकता है कि रोहिंग्या के खिलाफ बौद्ध नहीं अपितु आश्चर्य की बात यह है कि रोहिंग्या हिंसा के ख़िलाफ़ देश रक्षा के लिये अब बौद्ध भिक्षु भी भाग लेने लगे हैं। इस स्थिति को देखने के बाद रोहिंग्या मुस्लिमों को सिर्फ़ म्यांमार भर नहीं उन्हें दुनिया का कोई भी देश अपने यहाँ की नागरिकता देने को तैयार नहीं है ।

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने म्यांमार को चेतावनी दी है कि यदि वह एक विश्वसनीय देश के रूप में देखा जाना चाहता है तो उसे देश के पश्चिमी हिस्से में रह रहे अल्पसंख्यक मुसलमानों पर बौद्धों के हमले रोकना होगा उल्लेखनीय है कि गत वर्ष बौद्ध देश म्यांमार में अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ गुटीय हिंसा में बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे और करीब क लाख 40 हजार लोग बेघर हो गए थे। कुछ लोगों का मानना है कि यह स्थिति म्यांमार के राजनीतिक सुधारों के लिए खतरा है क्योंकि इससे सुरक्षा बल फिर से नियंत्रण स्थापित करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।
विश्व संस्था के महासचिव बान की मून ने हाल ही में कहा कि म्यांमार के अधिकारियों के लिए यह जरूरी है कि वह मुस्लिम-रोहिंग्या की नागरिकता की मांग सहित अल्पसंख्यक समुदायों की वैधानिक शिकायतों को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि ऐसा करने में असफल रहने पर सुधार प्रक्रिया कमजोर होगी और नकारात्मक क्षेत्रीय दुष्परिणाम ही मिलेंगे।

खुद संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि कुल आठ लाख रोहिंग्या आबादी का करीब एक चौथाई भाग विस्थापित है और उससे ज्यादा बुरा हाल अभी दुनिया की अन्य किसी भी विस्थापित कौम का नहीं है। रोहिंग्या विस्थापितों का सबसे बड़ा हिस्सा थाईलैंड और बांग्लादेश में रह रहा है, लेकिन अब भारत, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे नजदीकी देशों में भी उनके जत्थे देखे जाने लगे हैं।

पर उपदेश सकल बहुतेरे 
दुनिया भर में रोहिंग्या विस्थापितों की दुर्गति पर प्रश्न चिन्ह लगाने बाले मुल्ले कभी भी 58 मुस्लिम देशों से यह नहीं पूँछपाये की बह स्व जातियो को अपने देश में शरण और अपने देश की नागरिकता क्यों नहीं देते ….?


देश के लिए खतरा हैं रोहिंग्या, कुछ का आतंकियों से संपर्क : सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का हलफनामा

रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस म्यांमार भेजने की योजना पर केंद्र सरकार ने 16 पन्नों का हलफनामा दायर किया है। इस हलफानामे में केंद्र ने कहा कि कुछ रोहिग्या शरणार्थियों के पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों से संपर्क का पता चला है। ऐसे में ये राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से खतरा साबित हो सकते हैं। आतंकी कनेक्शन की खुफिया सूचना केंद्र ने अपने हलफनामे में साथ ही कहा, 'जम्मू, दिल्ली, हैदराबाद और मेवात में सक्रिय रोहिंग्या शरणार्थियों के आतंकी कनेक्शन होने की भी खुफिया सूचना मिली है। वहीं कुछ रोहिंग्या हुंडी और हवाला के जरिये पैसों की हेरफेर सहित विभिन्न अवैध व भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल पाए गए।'
देश में अवैध तरीके से बनवा रहे भारतीय पहचान पत्र सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा कि कई रोहिंग्या मानव तस्करी में भी शामिल पाए गए। वे बिना किसी दस्तावेज के एजेंटों की मदद से म्यांमार सीमा पार कर भारत आ गए और फिर यहां पैन कार्ड और वोटर आईडी जैसे भारतीय पहचान पत्र बनवाकर यहां अवैध तरीके से रह रहे हैं। केंद्र ने साफ किया कि इन अवैध रोहिंग्या शरणार्थियों को देश के नागरिकों जैसे अधिकार नहीं दिए जा सकते।

बौद्ध नागरिकों के खिलाफ उठा सकते हैं हिंसक कदम रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ म्यांमार में शुरू हुई सैन्य कार्रवाई की वजह से सैकड़ों-हजारों महिलाओं, बच्चों और पुरुषों को अपने घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ा है। ऐसे में केंद्र ने एक आशंका यह भी जताई कि ये रोहिंग्या देश में रहने वाले बौद्ध नागरिकों के खिलाफ हिंसक कदम उठा सकते हैं।
केंद्र ने यह भी चिंता जताई कि अवैध शरणार्थियों की वजह से कुछ जगहों पर आबादी का अनुपात गड़बड़ हो सकता है। ऐसे में वे रोहिंग्या शरणार्थी जिनके पास संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें भारत से जाना ही होगा।

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा
रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश के लिए गंभीर समस्या रोहिंग्या मुसलमान शरणार्थी बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था...

भारत की संस्कृति ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की रही है और इसीलिए वैश्विक स्तर पर आए संकट के समय भी हर तरह से पूरी दुनिया को मदद के लिए अपना हाथ बढ़ाता रहा है। भारत की सह्दयता और सहनशीलता सबको साथ लेकर चलने की रही है लेकिन कोई भारत को धर्मशाला समझ बैठे और अपने कुकृत्यों को छिपाकर भारत में शरणार्थी बनकर भारतवासियों के संसाधनो पर कब्जा करने की सोचे तो ये भी भारतवर्ष को कतई स्वीकार नहीं है। कुछ ऐसे ही देश के लिए नासूर बन गए हैं रोहिंग्या शरणार्थी जिनका मसला देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए भी बेहद संवेदनशील हो गया है। रोहिंग्या शरणार्थी को शरण देने में कुछ राज्य सरकारों का भी दोष है। खासकर पश्चिम बंगाल और जम्मू-कश्मीर की राज्य सरकारों ने वोट पालिटिक्स एवं सत्ता की लालच में करीब दशक भर पहले से इन्हें शरण देता आया है। अब उनकी यही नीति देश के लिए नासूर बन रही है और रोहिंग्या देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन गए हैं। ये शरणार्थी अवैध गतिविधियों में शामिल होते हैं, इसके सबूत भी मिले हैं। यहां यह ध्यान रखने की बात है कि ये वही रोहिंग्या हैं जिन्होंने अपनी नृशंसता से म्यांमार के रखाइन प्रांत को हिंदू-विहीन कर दिया है। अब बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुस्लिमों के देश में शरण लेने से इस बात की आशंका काफी बढ़ रही है कि पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा, अल-कायदा और यहां तक कि इस्लामिक स्टेट (IS) जैसे आतंकी संगठन भी उनका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए कर सकते हैं। इस बात के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं कि काफी संख्या में रोहिंग्या मुस्लिम आतंकी संगठनों में शामिल हुए हैं। बांग्लादेश पहले ही आतंकवाद की समस्या से जूझ रहा है।

भारत में आधिकारिक रूप से 40 हजार रोहिंग्या

भारत में पनाह लेकर रहने वाले रोहिंग्या शरणार्थियों को देश से निकालने की मांग हमेशा से होती रही है। हालांकि, 2017 में तत्कालीन केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजूजू ने आधिकारिक रुप से रोहिंग्याओं की संख्या 40,000 बताई थी। उन्होंने यह भी बताया कि इनमें लगभग 16,000 औपचारिक रूप से यूएनएचसीआर से शरणार्थी के रूप में पंजीकृत थे। हालांकि वर्तमान में रोहिंग्या प्रवासियों की सटीक संख्या का पता लगाना मुश्किल है। वैसे तो अब तक यह आंकड़ा काफी बढ़ गया होगा। अब भारत सरकार के सामने रोंहिग्या मुस्लिमों की रोजी-रोटी से कहीं बड़ा सवाल देश की सुरक्षा का है। दरअसल सरकार को ऐसे खुफिया इनपुट मिले हैं कि पाकिस्तान से ऑपरेट कर रहे टेरर ग्रुप इन्हें अपने चंगुल में लेने की साजिश में लग गए हैं। रोहिंग्या मुसलमान आईएसआई और आईएसआईएस के भी संपर्क में हैं। ऐसे में इनका भारत में रहना देश के लिए खतरा है।

रोहिंग्या देश की सुरक्षा के लिए खतरा

वैध रोहिंग्या प्रवासियों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा करार दिया गया है। यह भी बताया गया है कि ये अवैध गतिविधियों में शामिल हैं। सरकार ने कहा है कि रोहिंग्या समेत तमाम अवैध प्रवासी देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। उनके अवैध गतिविधियों में शामिल होने की रिपोर्ट भी मिली है। कांग्रेस, टीएमसी, लेफ्ट, एआईएआईएम, समाजवादी पार्टी और आरजेडी जैसे राजनीतिक दल रोहिंग्या मुसलमानों को वोट बैंक की नजर से देख रहे हैं। जबकि भारत सरकार का मानना है कि रोहिंग्या घुसपैठिये देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। कट्टरपंथी इस्लाम से भी इनका निकट संबंध माना जाता है।

सोची समझी साजिश है रोहिंग्या को बसाना !

भारत में घुस आए रोहिंग्या मुसलमानों को वापस भेजना इसलिये भी जरूरी है कि ये लोग म्यांमार में हिंसा के दौरान वहां से भाग कर नहीं बल्कि साजिश के तहत पिछले एक दशक के दौरान आए हैं। शंका इसलिए भी उठ रही है कि असम और बंगाल के शरणार्थी कैंपों को छोड़कर इतनी दूर ये जम्मू कश्मीर कैसे आ गए? जम्मू में रोहिंग्या मुसलमानों के बसाने के पीछे क्या मकसद है? कौन सी संस्थाएं हैं जो वहां सेटल करा रही हैं? जाहिर है इसमें किसी बड़ी साजिश की बू आ रही है। जम्मू और सांबा में बड़ी संख्या में रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिये बसे हुए हैं। ये लोग राजीव नगर, कासिम नगर, नरवाल, भंठिड़ी, बोहड़ी, छन्नी हिम्मत, नगरोटा और अन्य क्षेत्रों में बड़ी तादाद में हैं। दरअसल इन क्षेत्रों के भौगोलिक और जनसांख्यिकीय बदलाव के लिए ही इन्हें बसाने की साजिश रची गई है। गौरतलब है कि 2010 से लेकर अब तक रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या में करीब चार गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दरअसल यह हिंदू बहुल ‘जम्मू संभाग की जनसांख्यिकी को बदलने’ की साजिश का परिणाम है। इस साजिश के तहत बांग्लादेशी घुसपैठियों और घाटी के मुसलमानों को भी जम्मू में बसाया गया। उन्हें रोशनी एक्ट की आड़ में भूमि आवंटित की गई और मतदाता बनाया गया, ताकि चुनावी समीकरणों को प्रभावित किया जा सके। रोहिंग्या घुसपैठियों को राजनीतिक प्रश्रय देकर बंगाल में भी बड़ी संख्या में बसाया गया।

म्यांमार में हिंदुओं के सामूहिक नरसंहार में शामिल रहे रोहिंग्या 

एमनेस्टी इंटरनेशनल की जांच के अनुसार, रोहिंग्या मुसलमान आतंकवादियों ने 2017 के अगस्त में म्यांमार के सैकड़ों हिंदू नागरिकों की सामूहिक हत्या की थी। इस नरसंहार को ‘आरसा’ नाम के संगठन ने अंजाम दिया था, जिसने 99 निर्दोष लोगों को क्रूर तरीके से मौत के घाट उतार दिया था। रिपोर्ट के अनुसार 26 अगस्त, 2017 को ‘आरसा’ के आतंकवादियों ने म्यामांर में रखाइन प्रांत के ‘अह नौक खा मौंग सेक’ गांव के सभी पुरुषों को सामूहिक तौर पर मार दिया और महिलाओं को बंदी बना लिया था। बच्चों के सामने ही उनके परिजनों की सामूहिक हत्या की गई और बाद में उन्हें सामूहिक कब्र में दफना दिया गया।

भारत में घुसपैठियों को मुस्लिम देशों से की जाती है हवाला फंडिंग

जांच में यह बात भी सामने आई है कि इन घुसपैठियों को भारत में बसाने के लिए पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब आदि मुस्लिम देशों से हवाला फंडिंग की जा रही है। हवाला फंडिंग से खाए-अघाए कुछ एनजीओ, मदरसे, वेलफेयर सेंटर आदि बनाने/ चलाने की आड़ में इनकी सुगम बसावट सुनिश्चित कर रहे थे और जरूरी दस्तावेज जुटाने/ बनवाने में भी इनकी मदद कर रहे थे। भारत की खुफिया एजेंसियां अब इनको उघाड़ने में जुटी हुई हैं। 

वैसे तो रोहिंग्या मुसलमानों का मुद्दा पूरी दुनिया में छाया हुआ है लेकिन आजकल एक बेहद अजीब खबर उनके बारे में प्रचारित की जा रही है जिसमे उन्हें मानव मांस खाने वाला बताया जा रहा है. आज कोहराम न्यूज़ इसी खबर की पड़ताल करके आपके सामने रखेगा की यह खबर सच है या झूठ, क्या सच में रोहिंग्या मुसलमान इंसानी मांस खाकर अपनी भूख मिटाते है, क्या सच में बर्मा सरकार उन्हें इसीलिए देश से निकाल रही है क्योंकी उन्होंने वहां के बौधों को खाकर उनकी आबादी कम आकर दी और अब उन्हें भगाया जा रहा है. क्या दुनिया का कोई भी देश उन्हें इसीलिए पनाह नही दे रहा है क्योंकी उन्हें दर है की रोहिंग्या मुसलमान उनके बच्चो को खा जायेंगे.

वैसे आपको सुनने में यह बाते बेहद अजीब सी लग सकती है लेकिन ऐसी खबर सोशल मीडिया पर बड़ी तादात में वायरल की जा रही है की रोहिंग्या मुसलमान इंसानी मांस खाते है. वायरल की जा रही इन पोस्टों में कुछ फोटो लगाकर लिखा गया है की वैसे तो इस तरह की काफी पोस्ट वायरल की जा रही है जहाँ अलग अलग लोग भिन्न फोटो का इस्तेमाल करके यह साबित करने की कोशिश कर रहे है की रोहिंग्या मुसलमान इंसानी भक्षक है और उन्हें म्यांमार से इसी कारण भगाया जा रहा है.

आइये देखते है आखिर क्या सच है. इसमें जो फोटो इस्तेमाल किये गये है उनकी पड़ताल करते है.

इस वायरल मैसेज में एक फोटो इस्तेमाल किया गया हैे जिसमे इंसानी सिर दीवार के साहारे रखे गये है लेकिन आपको बताते चले की यह फोटो कम्पलीट नही है इस फोटो में गत्ते के एक टुकड़े पर सन्देश भी लिखा गया है जो सिरों के ठीक सामने है चूँकि उसपर साफ़ पढ़ा जा सकता है की यह फोटो ड्रग माफियाओं से सम्बंधित है इसीलिए उस सन्देश को बड़ी चालाकी से फोटोशॉप से कट कर दिया गया है. दरअसल इसमें जो लोग दिखाए गये है वो मक्सिको की जेल में हुई हिंसाओ में मारे गये थे और इन सभी का सम्बन्ध ड्रग माफिया गैंग से था. ना तो इनमे से किसी का सम्बन्ध रोहिंग्या से है और ना ही इनकी गर्दन इसलिए काटी गयी है की इन्हें पकाकर खाया जाए. लिंक देखें – :

http://www.borderlandbeat.com/2012/03/10-decapitated-heads-found-at.html

इसके बाद जो दूसरी फोटो इस मैसेज में दिखाई गयी है जिसमे साफ़ तौर पर देखा जा सकता है की कुछ लोग मानव शरीर को काट रहे है, दरअसल उस फोटो का सम्बन्ध थाईलैंड से है और यह मुसलमानों के बिलकुल विपरीत बौधों की एक प्रकार की धार्मिक क्रिया होती है जिसका नाम “Lang Pa Cha’ (लैंग पा चा), इस धार्मिक रिवाज के तहत जंगल की सफाई की जाती है अगर ऐसे में कोई अनजान मृत शरीर मिलता है तो उसके शरीर की एक-एक हड्डी को अलग करके साफ़ किया जाता है, जिसके लिए स्वंसेवक साथ रखे जाते है और पूरी प्रक्रिया मेडिकल स्टाफ की देख रेख में होती है. लिंक पर क्लिक करके आपको खुद सच का अंदाज़ा आ जायेगा 

https://www.documentingreality.com/forum/f10/field-dressing-man-23186/

सन 2009 में जब यह फोटो दुनिया के सामने आई थी तब इन्होने तहलका मचा दिया था. काफी लोगो ने थाईलैंड एम्बेसी को ईमेल के ज़रिये इन फोटोग्राफ की सच्चाई बताने के आग्रह किया और एक तरह की मुहीम चल पड़ी जिसे ‘मेतहुलु’ कहा गया. बाद में इनकी असलियत सामने आई थी की थाईलैंड के एक इलाके प्रन्चुबखीरी जगह के बौध लोग इस तरह की रीति रिवाज का पालन करते है. इसमें उन शरीर को साफ़ किया जाता है जो लावारिस अवस्था में मिलते है और उन्हें काट कर उनकी हड्डियाँ निकाल ली जाती है फिर उन्हें दफ़न किया जाता है. इस लिंक पर पूरी डिटेल पढ़ी जा सकती है –          http://www.snopes.com/photos/gruesome/thaicannibals.asp


दिल्ली में अर्थात् भारत की राजधानी जहाँ से प्रजातांत्रिक सरकार का संचालन होता है, जिसे सब से अधिक सुरक्षा की ज़रूरत है वहाँ ,रोहिंग्या।

दिल्ली में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिए बड़ी संख्या में रहते हैं। एक अनुमान के मुताबिक, दिल्ली में 1,100 से ज्यादा रोहिंग्या घुसपैठिए रहते हैं। बताया जाता है कि ये लोग अवैध तरीके से भारत में घुसे हैं। इन शरणार्थियों ने दिल्ली में अवैध तरीके से आधार कार्ड, पहचान पत्र, राशन कार्ड बनवा लिए हैं। ये दिल्ली के कई अलग-अलग इलाकों में झुग्गी बनाकर रहते हैं। 2003 में दिल्ली पुलिस ने अवैध घुसपैठियों को पकड़ने के लिए एक सेल बनाया था और इस दौरान करीब 40 हजार अवैध घुसपैठिए को पकड़ा भी गया था। लेकिन फिलहाल ये सेल अब कम सक्रिय हो गया है। दरअसल, सेल की कम सक्रियता के पीछे की वजह है कि ये अवैध घुसपैठिये ऐसे पहचान पत्र यहां बनवा लेते हैं कि जिससे ये जानना मुश्किल हो जाता है कि वे अवैध घुसपैठिये हैं या देश के नागरिक। 2018 में एक आरटीआई के जवाब में दिल्ली पुलिस ने बताया था कि 2014-18 के बीच करीब 1,134 घुपैठिए पकड़ने की जानकारी दी थी।
दिल्ली में किन इलाकों में रहते हैं रोहिंग्या
राजधानी दिल्ली के अलग-अलग इलाके में सैकड़ों रोहिंग्या शरणार्थी रहते हैं। सरकार ने जहां अभी बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुसलमान रहते हैं उसे दिल्ली सरकार को डिटेंशन सेंटर घोषित करने को कहा है। इसके अलावा भी दिल्ली में कुछ ऐसे इलाके हैं जहां अवैध घुसपैठिए रहते हैं। विकासपुरी, नजफगढ़, सीमापुरी रेलवे स्टेशन। जहांगीपुरी, भलस्वा डेयरी जैसे इलाके में अवैध घुसपैठिये की बड़ी तादाद है। इसके अलावा श्रम विहार, कालिंदी कुंज भी अवैध घुसपैठिये रहते हैं।
देश में रोहिंग्या मुसलमानों की कितनी संख्या
वर्ष 2017 में केंद्र सरकार ने बताया था कि देश में करीब 40 हजार अवैध रोहिंग्या घुसपैठिये रह रहे हैं। ये घुसपैठिये देश के अलग-अलग राज्यों या शहरों में रहते हैं। रोहिंग्या जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और राजस्थान में रहते हैं। उधर, संयुक्त राष्ट्र संस्ता UNHRC के अनुसार, भारत में 2021 के दिसंबर महीने तक देश के अलग-अलग इलाके में करीब 18 हजार रोहिंग्या मुसलमान रह रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक सबसे ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान जम्मू-कश्मीर के आसपास के इलाके में रहते हैं। खबरों के मुताबिक यहां करीब 5 हजार रोहिंग्या रहते हैं। हालांकि, कई पक्ष यहां 10 हजार रोहिंग्या मुसलमानों के होने का दावा करते हैं।

भारत को आतंक और बलात्कार की भूमि नहीं बनने देना चाहिये, जिन मुल्लो को भारत ने आश्रय दिया वही भारत की बर्बादी का तना बना बुनने में लगे है फिर एक और उदारता जिस पर भारत का विनाश स्पष्ट दिख रहा हो उसे स्वीकार कराने का मतलब भारत के धर्म, संस्कृति का समूल अंत । जो हमें स्वीकार नहीं ।


रोहिंग्या मुसलमान नरभक्षी है या संत मैं इस बात की पुष्टि नहीं करता क्यों की यह काम सरकार और उसकी जाँच एजेंसियो का है लेकिन एक प्रश्न जो बड़ा है और अभी भी खड़ा है की इन मुल्लो को इस्लामिक देश शरण क्यों नहीं देते …..?

हिंदू जागरूक बने, सतर्क रहे, दीर्घजीवी रहे, देश और स्वयं की के लिये हर गहरी तत्पर रहे ।

1947 भारत बिभाजन को पूरी तरह लागू करो ।
मुल्लो को इस्लामिक राष्ट्र पाकिस्तान मिला ।
हमे भारत हिंदू राष्ट्र चाहिये ।
जय हिंदू राष्ट्र



             आपका
देवेन्द्र पाण्डेय "डब्बू जी "

शुक्रवार, 1 जुलाई 2022

जना करती है जिस दिन के लिए संताने सिंहनिया
मेरे बेटों से कह देना की वो दिन आगया बेटा ….वो दिन आगया बेटा   
    
महमूद गजनवी ने सोमनाथ का मंदिर तोड़ा क्या हिंदुओ ने उसके ख़ुदा को गालियाँ दी थी ........?

बख्तियार खिलजी ने नालंदा विश्व विद्यालय को जलाया था
क्या हिंदुओ ने नवी का घर लूटा था ........?

अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर हमला किया था
क्या चित्तौड़ के राजा ने किसी मस्जिद और दरगाह को तोड़ा था ........?

बाबर ने अयोध्या में राम मंदिर को तोड़ा था
क्या किसी संत महंत ने किसी मुल्ला शासक का अपमान किया था ........?

औरंगजेब ने काशी और मथुरा के मंदिर तोड़े थे
क्या किसी हिन्दू राजा ने नवी अल्ला मुल्ला को गालियाँ दी थी ........?

अब्दाली ने भारत पर हमला किया था क्या हिंदुओ ने अल्ला के कुकर्मों पर पर्चे बाँटे थे ........?

जिन्ना ने अलग पाकिस्तान का निर्माण कराया था
क्या भारत में कभी मुल्लों का अपमान हुआ ........?

कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को मारा भगाया गया 
क्या हिंदुओ ने मुल्लियो की इज़्ज़त लूटी थी ........?

कसाब ने मुंबई के ताज होटल पर हमला किया था
क्या हिंदुओ ने कभी मुल्लों का नरसंहार किया था ........?

सिर्फ़ भारत भर नहीं पूरी दुनिया में आतंक का माहौल बनाने बाले मुसलमानो का अभियान निश्चित है ये दुनिया को इस्लामिक राष्ट्र बनाने आतंक फैला रहे है, पूरी दुनिया में अशांति और आतंक के दम पर ये सुनियोजित षड्यंत्र कर रहे है , कमलेश तिवारी, कन्हैया,चंदन गुप्ता, अंकित शर्मा, ध्रुव त्यागी अर्थात् हर प्रखर हिंदुत्वबादी हिन्दू की मौत नवी के अपमान का बहाना है मुल्लों का मकशद भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाना है , हिन्दू जागो और शतर्क रहो,

आतंकी भय को रोकने और हिंदुओ की सम्पत्ति तथा इज़्ज़त की रक्षा के लिए अखिल भारत हिन्दू महासभा ने जिन हांथो में लट्ठ पकड़ाया था बड़े दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि उन लट्ठ धारियों ने हिंदुत्व की मर्याद को त्याग कर आतंकियो और अलगावबादियो की बकरियाँ चराने का काम शुरू कर दिया  इनका DNA अर्थात् बाप बदल गया है अब इनके भरोषे रहने का अर्थ है की अपनी गर्दन मुल्लों को समर्पित कर देना 👇

https://twitter.com/Devendrahindu/status/1543113028396232704

जिनका DNA बदल गया और जिनके सिद्धांत बदल गए उनसे सतर्कता में ही सुरक्षा है

भगत, सुभाष और चंद्र्शेखर  का इंतज़ार करना ठीक नहीं स्वयं ही स्वयं को स्वाभिमानी,देशभक्त और ज़िन्दा हिन्दू की परिभाषा से भाषित करना होगा बरना इतिहास हमें सिर्फ़ लोभी और कायर कहेगा 


जब हिन्दू काटे जाएगे,तब अल्ला अल्ला चिल्लायेंगे
आओ हिन्दू तुम्हें हिन्दू से मिलबाते है, झूठे अहम बहम पर गर्व नहीं
शर्म करो तुम 👇ऐसे हिन्दू होने पर

यादव ………… मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?
जाट ……....…...मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?
सिक्ख ……..…..मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?
सिंधी …......…....मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?
पटेल …….....….मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?
गुजर …….....….मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?
जैन……......…...मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?
ठाकुर …………मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?
ब्रामण …………मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?
शर्मा ……...…...मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?
वर्मा …………...मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?
कोली …………मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?
भूमिहार ….……मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?
विश्वकर्मा ……....मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?
भडवार ……..…मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?
दासनामी ………मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?
सोनी ……....…..मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?
तेली …….....…..मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?
बैरागी  …….…..मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?
प्रजापति ………मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?
क़ुशबाहा ……...मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?
हरिजन ……….मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?
आदिवासी ……मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?
वनबासी………मुसलमान मिल कर हिन्दू का विरोध  हिंदुओ की हत्या कर रहे है ....... ?

ऐसी ही असंगठित अर्थात् सभी 36 हज़ार हिन्दू जातीय
मुसलमानो के साथ मिल कर हिंदुओ को मारेंगी काटेंगी

 केरल ,दिल्ली ,उत्तर प्रदेश ,तेलंगाना ,आंध्र प्रदेश ,आसम ,राजस्थान और कश्मीर की तरह हिंदुओ की हत्या उनकी सम्पत्ति और इज़्ज़त लूटी जाएगी ,भय और लोभ के कारण जल्दी ही पूरे भारत में हिन्दू द्वारा ही हिन्दू का विरोध,हिन्दू द्वारा हिंदुओ की हत्या होगी इस जातीय ज़हर की खेती सिर्फ़ हिंदुओ के मन में हिंदुओ के ख़िलाफ़ ही बोई जा रही है जिसे बिधर्मियी द्वारा राजनैतिक लोभ आर्थिक लोभ की फुहारों से सींचा जा रहा है,जिस कारण आने बाले दिनो में खुल्लम खुल्ला हिन्दू को हिन्दू ही चुनाव में हरवाएगे,और सत्ता पर बिधर्मियी ग़द्दारों लुटेरों और हिंदुओ के हत्यारों की सरकार हिंदुओ की हिंदुओ से ग़द्दारी के कारण बनेगी जिसका परिणाम घर घर में  सिर्फ़ अल्ला हूँ अकवर होगा…..?

हज़ारों मुल्ले है जो नवी अर्थात् अल्ला के ख़िलाफ़ बोलते है खुद इनकी क़ुरान में अल्ला के कर्म जिसे आम भाषा में कुकर्म कहते है स्पष्ट लिखे है लेकिन ये कठमुल्ले कभी अपने धर्म के लोगों का सर तन से जुदा नहीं करते ना ही अपने क़ुरान की सत्यता को स्वीकार कर उसका तिरस्कार करते है
अर्थात् इनकी मंशा स्पष्ट है हिंदुओ का क़त्ल और मुस्लिम राष्ट्र की स्थापना जिसे समझने की ज़रूरत है, हिंदुओ के मन में हिंदुओ के प्रति नफ़रत भर कर हिन्दू को लड़ा रहे है और भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने का रास्ता साफ़ कर रहे है आज इन्हें क़ानून का भय नहीं है चेतावनी देकर हत्या और सरकार की उदासीनता तथा हिन्दू की लापरवाही के परिणाम चिंता जनक है

🙏हिंदुओ चिंतन करो🙏

कौन हिन्दू बचेगा…..?
कौन हिन्दू कटेगा…..?
कौन हिन्दू जीतेगा …?
कौन हिन्दू हारेगा …..?
फ़ायदा किस हिन्दू का……… ?
घाटा किस हिन्दू का………?

हिन्दू चिंतन करो हिन्दू कौन …….?

इस पोस्ट में मुसलमान शव्द लिखने के कारण ही हमारी पोस्ट फ़ेस बुक द्वारा दिनांक १ जून २२ को पोस्ट करते के साथ ही डिलीट कर दी गई ,मैंने लगातार कई बार प्रयत्न किया लेकिन हर बार मेरी पोस्ट को फ़ेसबुक ने डिलीट कर दिया अर्थात् मुसलमानो के कुकर्मों पर हम बोल भी नहीं सकते और ये मुल्ले निर्भिकता से हमारी गर्दन काट रहे है सरकार ने हिन्दू को लिखने पर पाबंदी लगाई और मुल्लों के ऊपर ….?
कठमुल्लों की धमकी से हम चुप हो जाए मतलब जीते जी मार जाए ऐसी कायरता हमें स्वीकार नहीं , सत्य कहने सुनने और समझने की आप भी आदत डाले 🙏 

मेरी हर पोस्ट सिर्फ़
स्वाभिमानी
देशभक्त
चिंतनशील 
और ज़िन्दा हिंदुओ को समर्पित है 

समय कम है, हिन्दू संगठित हो

हमें चाहिए ज़िन्दा हिन्दू, मुर्दों का कोई काम नहीं
खुद खुद को पहचानो हिन्दू
तुम ज़िन्दा हो
तुम ज़िन्दा हो
तुम ज़िन्दा हो 
ज़िन्दा लाश नहीं 
जागो रे जागो 
🙏🚩🙏

 आपका
देवेन्द्र पाण्डेय "डब्बू जी "

गुरुवार, 9 जून 2022

 मियाँ सत्यता स्वीकारो किसी हिन्दू की हत्या का फ़तवा जारी करने से पहले दिमाग़ ठंडा करो

राजपाल प्रकाशन की दमदार सत्य आधारित किताव 
हमने पढ़ा तुम भी पढ़ो, चंपूपति जी द्वारा लिखित रंगीला रसूल 

इस पुस्तक में ऐसा क्या लिखा है जो सत्य नहीं है
या आप की क़ुरान में नहीं लिखा है या अलग से जोड़ा गया है…?

https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%80%E0%A4%B2%E0%A4%BE_%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%B2

                                               रंगीला रसूल

https://skanda987.files.wordpress.com/2019/01/hindi-rangeela-rasool.pdf

तो क्या कमलेश तिवारी की ही तरह नृपुर शर्मा  की हत्या हो जायेगी…?

मुल्ला,क़ाज़ी,हाजी,पाजी तुम फ़तवा जारी करते हो हिंदुओ का क़त्ल करबातें हो , इससे ये सिद्ध नहीं होता की तुम बहादुर हो ये हमारे सरकार का दोगलापन है तभी ओबैसी के भेष में तुम १५ मिनट में भारत के सभी हिंदुओ का क़त्ल करने की बात करते हो , 

https://www.youtube.com/watch?v=DE3p0IOKh6c

https://hindi.oneindia.com/news/2013/01/01/india-andhra-mla-gives-hate-speech-against-hindu-muslim-225267.html


तुम्हारी औक़ात नहीं की भारत को हिन्दू विहीन करदो
लेकिन मदनी के रूप में तुम हिंदुओ को भारत छोड़ने की बात करते हो, 

https://indiansamaachaar.com/%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A5%82%E0%A4%A6-%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%BE-%E0%A4%B9/


https://www.youtube.com/watch?v=zRb54VZhAic




तुमने भाजपा सरकार में बिजनोर के मौलवी सैयद कैफी अली और मौलाना अनवरुल हक़ नईम के रूप में कमलेश तिवारी की सुपारी घोषित की तुमने अशफाक हुसैन और मोइनुद्दीन खुर्शीद पठान अलावा अन्य 5 के रूप में  उनकी हत्या की , 

https://zeenews.india.com/hindi/india/kamlesh-tiwari-maulvi-confesses-to-meeting-killers/588558

https://www.abplive.com/states/up-uk/lucknow-hindu-mahasabha-leader-kamlesh-tiwari-murder-in-his-office-1464763

https://www.amarujala.com/uttar-pradesh/azamgarh/action-should-be-taken-against-those-who-declare-the-reward-for-killing-kamlesh-tiwari-azamgarh-news-vns4904022159



तुमने फिर भजपा सरकार में.हाईकोर्ट के वकील कवी अब्बासी  के रूप में नृपुर शर्मा के हत्या की सुपारी घोषित की कल उमकी भी हत्या करोगे , परसों हमारी फिर किसी और हिंदुत्व भगवा ध्वज बाहक की हत्या ….फिर किसी हिन्दू की हत्या ….. फिर हत्या …..?

http://networkmahanagar.com/%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0-%E0%A4%B6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-aimim-%E0%A4%A8%E0%A5%87/


https://www.youtube.com/watch?v=PVI5CKXXAF4



आख़िर कब तक मुल्ला,क़ाज़ी,हाजी,पाजी हिन्दू को डराते रहोगे 

और सत्ता लोभी सरकारें इन्हें इस उदंडता की छूट देती रहेगी ….?

मुल्लों तुम्हारी शक्ति संगठित रहना और सत्ता लोभियों को वोटों का प्रलोभन देकर अपनी बात मनबाने का दवाव बनाना तथा धीरे धीरे भारत के टुकड़े टुकड़े करना और इस पवित्र देवभूमि को इस्लामिक राष्ट्र बनाने के षड्यंत्र में तुम हर घड़ी संलग्न हो 
और हमारा हिन्दू हज़ारी वर्षों की ग़ुलामी झेलने के बाद छडिक मिली स्वतंत्रता के मद में गहरी नीद सो रहा है हिंदुओ फिर काटे जाओगे ,जातियों में बाँटे जाओगे और ग़ुलाम बनाए जाओगे जिसकी तैयारी आँखे खोलने पर तुम्हें स्पष्ट दिखाई देगी और जव तुम चैतन्य हो कर चिंतन करोगे तो तुम्हें  सारा षड्यंत्र समझ में आ जाएगा

आँखे खोलो मेरे बंधुओ तुम्हारे पास समय कम है चिंतन करो जागो हिन्दू तुम मुल्लों के हँथो मरने के लिए और सत्ता लोभियों के हँथो षड्यंत्र के भँवर जाल में फँस कर अपने आतित्व को समाप्त करने कब तक मूक दर्शक बने रहोगे कब तक शांत बैठे अपनी मौत का इंतज़ार करते रहोगे , प्रमाण देखो और जाग्रत हो चैतन्य हो  ।

देशद्रोही,ग़द्दार और षड्यंत्रकारी हमरा क़त्ल करते रहे और हम अपनो को श्रधांजलि अर्पित करते रहे अब ये नहीं होगा , जैसा प्रेम ये द्रोही हमारे साथ करे वैसा ही प्रतिफल उन्हें देने के लिए हमें तैयार रहना ही होगा , ये हमारे पूजित आराध्या शिवलिंग पर बाजू करे उनपर थूके और हम खमोस रहे ये कायरता है , १८६२ देवालयों पर विधर्मियी का क़ब्ज़ा है 

http://dewdoot.blogspot.com/2022/05/blog-post_27.html

अर्थात् हमारा धार्मिक स्वाभिमान ग़ुलामी की ज़ंजीरो में जकड़ा है उसे मुक्त कराने स्वाभिमानी, देशभक्त, बहादुर और ज़िन्दा हिंदुओ को जागना ही होगा, बरना कल अपना घर, सम्पत्ति सब छोड़कर भागना होगा, जागो रे जागो


           आपका
देवेन्द्र पाण्डेय "डब्बू जी "

बुधवार, 1 जून 2022

     हमने निश्छल प्रेम किया

और तुमने जेहाद किया सत्ता के लोभ में हमारे जीवन मरण का सौदा किया हरहाल में ज़बरदस्ती की, कभी सत्ता हथियाने और अपना अस्तित्व बचाने के लिए, कभी धर्म के विस्तार तो कभी आवरू के हरण का षड्यंत्र किया,

तुम जेहादी हो ,जेहादी हो , सिर्फ़ जेहादी हो ,

हमने हर हाल में सिर्फ़ निश्छल प्रेम किया भरोषा किया और तुमने हर घड़ी सिर्फ़ और सिर्फ़ जेहाद किया, इतिहास में दर्ज प्रशंग आपसी प्रेम और आत्मियता के सम्बंध सिर्फ़ हिंदुओ का एक तरफ़ा प्रेम ही हिंदुओ के पतन का कारण हुआ, जब की जेहदियो के प्रेमषड्यंत्र सत्ता के कुटिनीतिक सौदे थे, कभी प्रेम तो कभी षड्यंत्र के नाम पर सत्ता लोभ के जो सौदे हुए उस पर दोनो तरफ़ से बार बार महिलायें ही दाव पर लगाई गई ,शायद आज का जेहाद हमारे कल के आत्मीय प्रेम की भयानक भूल का ही परिणाम है, महिलाओं के साथ षड्यंत और उनके सौदे बंद होने ही चाहिए, क्यों की इतिहास गवाह है मुग़लों , तुर्कों , पठानो , कबलियो से किए गए हिंदुओ की आवरू के सौदे से भी हम और हमारा देश सुरक्षित नहीं थे,ना सुरक्षित है, ना ही सुरक्षित होने की उम्मीद ही है, अब इस रोटी - बेटी के स्वार्थी रिश्ते रूपी षड्यंत्र को रोकना ही होगा अन्यथा धर्म संस्क्रति संस्कार और राष्ट्र सब कुछ इस षड्यंत्र में स्वाहा हो जाएगा, भरत का भारत कलंकित होगा और हिन्दू कभी भी स्वातंत्र ना होने की शर्त पर हमेशा हमेशा के लिए अनंत काल के लिए ग़ुलाम होजएगा

👇हिन्दू राजाओं की निश्छल प्रेम कथा के कुछ उदाहरण 👇

1-  बप्पा रावल-गजनी के मुस्लिम शासक की बेटी- सबसे पहले हम बात करेंगे चित्तौड़गढ़ के महान शासक बप्पा रावल की जिन्हें काल भोज के नाम से भी जाना जाता है और उन्हें “फादर ऑफ रावलपिंडी” की उपाधि भी दी गई है। काल भोज ने 30 से अधिक मुस्लिम राजकुमारियों से विवाह किया था, जिनमें गजनी के मुस्लिम शासक की बेटी भी शामिल है। लेकिन हमारे देश के इतिहासकारों ने इस आपसी प्रेम संबंध की जानकारी को छिपाए रखा।

2-  महाराजा छत्रसाल-रूहानी बाई- राजा छत्रसाल को कौन नहीं जानता उनका विवाह भी मुस्लिम युवती के साथ हुआ था जो कि हैदराबाद के निजाम की पुत्री थी और नाम था रूहानी बाई। रूहानी बाई और राजा छत्रसाल ने एक बेटी को जन्म दिया जिसका नाम था मस्तानी, आगे चलकर मस्तानी ने भी मराठा शासक बाजीराव प्रथम से प्रेम विवाह किया था। हालांकि बाजीराव प्रथम का यह द्वितीय विवाह था।

3-  महाराणा अमरसिंह जी- शहजादी खानुम- भारत के पुत्र वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप ने हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर की मुगल सेना को बुरी तरह पराजित कर दिया। इसके बाद उनका पुत्र महाराणा अमर सिंह मेवाड़ के शासक बने और उन्होंने अकबर की बेटी शहजादी खानुम के साथ विवाह किया, लेकिन इतिहासकारों ने इस प्रेम विवाह का जिक्र कभी नहीं किया।

4-  राणा सांगा-मेरूनीसा- मेवाड़ के महान शासकों में शामिल और शरीर पर 80 घाव लगने के बाद भी दुश्मनों को नानी याद दिलाने वाले मेवाड़ी महान सम्राट महाराणा सांगा ने 4 मुस्लिम लड़कियों से प्रेम विवाह किया था, जिनमें “मुस्लिम सेनापति के बेटी मेरुनिसा” का नाम शामिल है।

5-  विक्रमजीत सिंह-आजमगढ़ की मुस्लिम लड़की- अपने समय के महानतम राजाओं में शामिल विक्रमजीत सिंह गौतम का आजमगढ़ की मुस्लिम लड़की से प्रेम विवाह को इतिहासकार लिखने से परहेज करते आए हैं।

6-  राजा हनुमंत सिंह-जुबेदा- जोधपुर के राजा हनुमंत सिंह और मुस्लिम लड़की जुबेदा का प्रेम विवाह जगजाहिर है लेकिन इतिहासकारों ने इस विवाह को हमेशा ही गुप्त रखा।

7-  कुंवर जगत सिंह-मरियम- इसके अलावा उड़ीसा के नवाब कुतुल खा की बेटी मरियम और कुंवर जगत सिंह का प्रेम विवाह, मेवाड़ के शासक महाराणा कुंभा और जागीरदार वजीर खान की बेटी का प्रेम विवाह, मौर्य वंश के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य और सिकंदर के सेनापति सेल्यूकस की बेटी हैलेना का प्रेम विवाह, राजा मानसिंह और मुबारक का प्रेम विवाह, अमरकोट सम्राट वीरसाल और हमीदा बानो का प्रेम विवाह, मौर्य शासक राजा बिंदुसार और अमीर खुरासन की बेटी नूर खुरासन का प्रेम विवाह 

अल्लाउदीन खिलजी की बेटी "फिरोजा"" जो जालोर के राजकुमार विरमदेव की दीवानी थी वीरमदेव की युद्ध मै वीरगति प्राप्त होने पर फिरोजा सती हो गयी थी!

औरंगजेब की एक बेटी ज़ेबुनिशा जो कुँवर छत्रसाल के पीछे दीवानी थी ओर प्रेम पत्र लिखा करती थी ओर छत्रसाल के अलावा किसी ओर से शादी करने से इंकार कर दिया था!

औरंगजेब की पोती ओर मोहम्मद अकबर की बेटी सफियत्नीशा जो राजकुमार अजीत सिंह के प्रेम की दीवानी थी!
इल्तुतमिश की बेटी रजिया सुल्तान जो राजपूत जागीरदार कर्म चंद्र से प्रेम करती थी!

औरंगजेब की बहन भी छत्रपति शिवाजी की दीवानी थी शिवाजी से मिलने आया करती थी!

ये प्रेम कथाए ,प्रेम विबाह इतिहास के पन्नों से शायद इस लिए ग़ायब है की कही आज का मुसलमान कल के हिन्दू राजाओं के प्रेम प्रशंग, प्रेम विबाह से नाराज़ ना हो, इतिहास भी मुस्लिम तुष्टिकरण के आधार पर ही लिखा गया हिंदुओ के निश्छल प्रेम प्रशंग को छुपाया गया और मुसलमानो के जेहादी षड्यंत्रो को संबंधो की मधुरता बताया गया।

सत्ता, सम्पत्ति के लोभ, हिन्दू राजाओं का हिन्दू राजाओं से आपसी भेद और मुग़लों के दवाब प्रभाव में आकर हिन्दू राजाओं ने मुसलमानो को अपनी बेटियाँ सौंपी जो इतिहास को शर्मिंदा करने और मुसलमानो के जेहाद को सबल बनाने का आज भी कारण बना हुआ है 👇



जनवरी 1562, अकबर ने राजा भारमल की बेटी से शादी की (कछवाहा-अंबेर)
नवंबर 1569, महारावल हरिराज सिंह ने अपनी पुत्री राजकुमारी नाथी बाई का विवाह अकबर से किया 
(भाटी-जैसलमेर)
15 नवंबर 1570, राय कल्याण सिंह ने अपनी भतीजी का विवाह अकबर से किया (राठौर-बीकानेर)
1570, मालदेव ने अपनी पुत्री रुक्मावती का अकबर से विवाह किया (राठौर-जोधपुर)
1573, नगरकोट के राजा जयचंद की पुत्री से अकबर का विवाह (नगरकोट)
मार्च 1577, डूंगरपुर के रावल की बेटी से अकबर का विवाह (गहलोत-डूंगरपुर)
1581, केशवदास ने अपनी पुत्री का विवाह अकबर से किया (राठौर-मोरता)
16 फरवरी, 1584, राजकुमार सलीम (जहांगीर) का भगवंत दास की बेटी से विवाह (कछवाहा-आंबेर)
1587, राजकुमार सलीम (जहांगीर) का जोधपुर के मोटा राजा की बेटी से विवाह (राठौर-जोधपुर)
2 अक्टूबर 1595, रायमल की बेटी से दानियाल का विवाह (राठौर-जोधपुर)
28 मई 1608, जहांगीर ने राजा जगत सिंह की बेटी से विवाह किया (कछवाहा-आंबेर)
1 फरवरी, 1609, जहांगीर ने राम चंद्र बुंदेला की बेटी से विवाह किया (बुंदेला, ओर्छा)
अप्रैल 1624, राजकुमार परवेज का विवाह राजा गज सिंह की बहन से (राठौर-जोधपुर)
1654, राजकुमार सुलेमान शिकोह से राजा अमर सिंह की बेटी का विवाह (राठौर-नागौर)
17 नवंबर 1661, मोहम्मद मुअज्जम का विवाह किशनगढ़ के राजा रूप सिंह राठौर की बेटी से (राठौर-किशनगढ़)
5 जुलाई 1678, औरंगजेब के पुत्र मोहम्मद आजाम का विवाह कीरत सिंह की बेटी से हुआ. कीरत सिंह मशहूर राजा जय सिंह के पुत्र थे (कछवाहा-आंबेर)
30 जुलाई 1681, औरंगजेब के पुत्र काम बख्श की शादी अमरचंद की बेटी से हुए (शेखावत-मनोहरपुर)


10 हिंदू राज कुमारियाँ जो मुग़लों ,सल्तनो की वेगम बनी ये राजनैतिक समझौते थे या इतिहास का अपभ्रंश था जिसे आज भी हिन्दू समाज अपमान सहित गर्व से झेल रहा है.

चित्तौड़ की रानी पद्मिनी और मुगल शासक अलाउद्दीन खिलजी की कथित मनगढ़ंत प्रेम कहानी को मुग़लों और उनके चाटुकारों ने खूब हवा दी परन्तु सत्य आधारित इतिहासकारों ने इस झूठे प्रपंच को सिरे से खारिज कर दिया है. सत्य आधारित इतिहासकारों ने पद्मिनी अथवा पद्मावती का जिक्र महज राजा रतन सिंह की पत्नी और अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के बाद जौहर करने वाली रानी के रूप में माना है. पैसे के लोभी फिल्म मेकर संजय लीला भंसाली को फिल्म 'पद्मावती' को लेकर राजपूत समाज का भारी विरोध झेलना पड़ा. इतिहासकारों ने भी इसे कपोल कल्पित कहानी करार दिया है. बहरहाल, हम यहां रानी पद्मिनी नहीं बल्‍कि उन 10 हिंदू राजघरानों की राजकुमारियों की बात कर रहे हैं, जो मध्यकालीन भारतीय इस्लामी हुकूमतों के साथ सियासी संबंधों में अहम भूमिका रखती हैं. इन सभी राजकुमारियों की शादियां सुल्तानों, शहजादों के साथ कर दी गईं थी.
जिस वैवाहिक संबंध की नीति का बड़े पैमाने पर आरम्भ अकबर ने किया था, उसके परिणाम हिन्दू इतिहास के लिए कलंकित करने बाले और भयाबह थे. अकबर ने जो विवाह कछवाही राजकुमारी से किया था उससे सलीम का जन्म हुआ. इस निकट संबंध से आमेर के राजपरिवार को महत्व मुगल दरबार और राजस्थान में बढ़ गया. इसका महत्वपूर्ण परिणाम यह हुआ कि मारवाड़ (जोधपुर) के मोटा राजा उदयसिंह ने भी अपने सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त करने के अभिप्राय से अपनी पुत्री मानीबाई का विवाह सलीम के साथ कर दिया. जोधपुर की राजकुमारी होने से उसे जोधाबाई कहने लगे. इसी जोधाबाई को शाहजादा सलीम ने 'जगत-गुसाई' की पदवी देकर सम्मानित किया. इसी जोधाबाई से खुर्रम पैदा हुआ था. (संदर्भ- डॉ. जीएन शर्मा कृत 'राजस्थान का इतिहास', पेज-380).
भारत के मध्यकालीन इतिहास में राजपूत वंशों की भांति कछवाह भी राजस्थान के इतिहास मंच पर बारहवीं शताब्दी से महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं. इसी वंश के शक्तिशाली शासक पंचवनदेव की मृत्यु के बाद मालसी, जिलदेव, रामदेव किल्हण, कुन्तल जणशी, उदयकरण, नरसिंह, उदरण और चन्द्रसेन ने शासन किया. चंद्रसेन के बाद बेटा पृथ्वीराज और उसकी मृत्यु (1527 ई.) के बाद छोटा बेटा पूर्णमल आमेर का शासक बना. पूर्णमल के साथ ही राजगद्दी के लिए गृह-कलह शुरू हो गया. इस गृह-कलह से गुजरते हुए पूर्णमल से भीमदेव, भीमदेव से रत्न सिंह, आसकरण होते हुए सत्ता भारमल के पास पहुंची. कछवाह वंश के आमेर(जयपुर) शासक भारमल को अधिकांश इतिहासकारों ने दूरदर्शी बताया है. शेरशाह और अकबर जैसी बड़ी शक्तियों के बीच आमेर में अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए उसने अकबर से संबंध बनाए. इन्हीं सियासी संबंधों को और करीबी बनाते हुए उसने बाई हर्का का अकबर से विवाह किया. 1562 में हुए इस विवाह से प्रेरित होकर अन्य राजस्थानी शासकों ने भी अपनी राजकुमारियों का विवाह अकबर और उसके राजकुमारों से करना शुरू कर दिया. (संदर्भ- डॉ.गोपीनाथ शर्मा, राजस्थान का इतिहास,पेज-149).
राजस्थान यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के भूतपूर्व प्रोफेसर और विख्यात इतिहासकार डॉ.गोपीनाथ शर्मा की रचना 'राजस्थान का इतिहास' में आमेर की राजकुमारी और अकबर के विवाह के साथ अन्य राजपूत-मुगल विवाहों का उल्लेख है. इसमें बताया गया है कि बीकानेर नरेश राय सिंह की पुत्री का भी संबंध जहांगीर से हुआ था, जिससे वहां के नरेशों की पद-वृद्धि होती रही.
अकबर ने 1585 ई. में जहांगीर को 12 हजार मनसबदार बनाया. 13 फरवरी, 1585 ई. को सलीम का विवाह आमेर के राजा भगवानदास की पुत्री मानबाई से हुआ. मानबाई को जहांगीर ने ‘शाह बेगम’ की उपाधि प्रदान की थी. कहा जाता है कि मानबाई ने जहांगीर की शराब की आदतों से दुखी होकर आत्महत्या कर ली थी. हालांकि इस बात की सत्यता को कई इतिहासकारों ने स्वीकार नहीं किया है. कालांतर में जहांगीर का विवाह जोधाबाई के साथ हुआ था. (संदर्भ- भारतडिस्कवरी के जहांगीर आलेख से).
शोध और शैक्षिक अनुसंधान तथा प्रसार संस्थान इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र से मिले 'जैसलमेर के शासक तथा इनका संक्षिप्त इतिहास' की मानें तो 1570 ई. में जब अकबर ने नागौर में मुकाम किया, तो वहां पर जयपुर के राजा भगवानदास के माध्यम से बीकानेर और जैसलमेर दोनों को संधि के प्रस्ताव भेजे गए. जैसलमेर शासक रावल हरिराज ने संधि प्रस्ताव स्वीकार कर अपनी पुत्री नाथीबाई के साथ अकबर के विवाह की स्वीकृति प्रदान कर राजनैतिक दूरदर्शिता का परिचय दिया. रावल हरिराज का छोटा पुत्र बादशाह दिल्ली दरबार में राज्य के प्रतिनिधि के रुप में रहने लगा. अकबर द्वारा उसे फैलादी का परगना जागीर के रूप में प्रदान की गई.
सन् 1570 में जैसलमेर की राजकुमारी नाथीबाई और अकबर के विवाह के बाद भाटी-मुगल संबंध समय के साथ-साथ और मजबूत होते चले गए. इसके बाद शहजादा सलीम को हरिराज के पुत्र भीम की पुत्री ब्याही गई, जिसे 'मल्लिका-ए-जहान' का खिताब दिया गया था. स्वयं जहांगीर ने अपनी जीवनी में लिखा है, 'रावल भीम एक पद और प्रभावी व्यक्ति था, जब उसकी मृत्यु हुई थी तो उसका दो माह का पुत्र था, जो अधिक जीवित नहीं रहा. जब मैं राजकुमार था तब भीम की कन्या का विवाह मेरे साथ हुआ और मैंने उसे 'मल्लिका-ए-जहान' का खिताब दिया था. यह घराना सदैव से हमारा वफादार रहा है, इसलिए उनसे संधि की गई.' (संदर्भ-इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के 'जैसलमेर के शासक तथा इनका संक्षिप्त इतिहास' से) यह भी गौरतलब है कि मुगल साहित्यकारों ने तो भीम की पुत्री के इस विवाह का उल्लेख किया है लेकिन राजस्थान के कई इतिहासकारों ने इसका जिक्र तक नहीं किया. ऐसे हम इस बात की पुष्टि नहीं कर सकते.परन्तु इसे झुठलाने के प्रमाण भी नहीं है ।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष रहे नामचीन इतिहासकार सतीश चंद्र ने अपनी 'मध्यकालीन भारत' पुस्तक में लिखा है कि राजपूतों के साथ अकबर के संबंधों को देश के शक्तिशाली राजाओं और जमींदारों के प्रति मुगलों की नीति को व्यापाक कर पृष्ठभूमि में देखना होगा. हुमायूं जब भारत वापस आया तो उसने इन तत्वों को साथ लेने की एक नीति आरंभ की. सतीश चंद्र ने अबुल फजल के हवाले से लिखा है कि 'जमींदारों को खुश करने के लिए उसने उनके साथ विवाह संबंध बनाए'. भारत के बड़े जमींनदारों में से एक जमाल खान मेवाती ने जब हुमायूं की अधीनता स्वीकार कर ली तो उसकी सुंदर बेटियों में से एक से उसने विवाह कर लिया. यही नहीं उसकी छोटी बहन का विवाह बैरम खान से करा दिया. कालांतर में अकबर ने इसी नीति का प्रसार और विस्तार किया.
हुमायूं और अकबर से पहले विजयनगर साम्राज्य में भी हिंदू राजकुमारी का विवाह एक सुल्तान के साथ विवाह हुआ था. दरअसल, देवराय प्रथम (1406-1422 ई.) को अपने शासन काल में बहमनी सुल्तान फ़िरोजशाह के आक्रमण का सामना करना पड़ा था. इस युद्ध में फ़िरोज शाह बहमनी से पराजित होने के कारण देवराय प्रथम ने अपनी पुत्री का विवाह फ़िरोज शाह के साथ कर दिया. इस विवाह में दहेज के रूप में देवराय ने बांकापुर का क्षेत्र फ़िरोज शाह को दे दिया.
दक्षिण भारत में देवराय प्रथम की पुत्री का विवाह ऐसा पहला राजनीतिक विवाह नहीं था. इससे पहले ख़ेरला का राजा शान्ति स्थापित करने के लिए फ़िरोजशाह बहमनी के साथ अपनी लड़की की शादी कर चुका था. कहा जाता है कि वह सुल्तान की सबसे पहली बेगम थी. किन्तु यह विवाह अपने आप में शान्ति स्थापित नहीं कर सका. कृष्ण-गोदावरी के बीच के क्षेत्र को लेकर विजयनगर, बहमनी राज्य और उड़ीसा में फिर संघर्ष छिड़ गया था. (संदर्भ- भारतडिस्कवरी ).
अकबर से आमेर की राजकुमारी की शादी की कई विद्वानों ने कटु आलोचना की है. उन्होंने इस विवाह को धर्म-विरुद्ध और निंदनीय बताया था. उनकी यह मान्यता भी थी कि आमेर के शासक ने अपनी कन्या का विवाह सम्राट के साथ कर दिया तो अन्य राजपूत नरेशों को भी ऐसा करने के लिए बाध्य होना पड़ा. (संदर्भ- डॉ.गोपीनाथ शर्मा, राजस्थान का इतिहास,पेज-148).

बता दें कि अकबर के साथ विवाह संबंध होने के बाद आमेर के शासक मुगल राज्य व्यवस्था के अंग बन गए, उनके पुत्र, पौत्र राजकीय सेना में प्रतिष्ठित पद पर नियुक्त किए गए. स्वयं भारमल 'अमीन-उल-उमरा' और 'राजा' की उपाधियों से सम्मानित किए गए. अकबर के बाद जहांगीर ने भी राजपूतों के साथ विवाह संबंधों को जारी रखा, लेकिन शाहजहां के काल से अग्रणी राजपूत राजाओं के साथ कोई और विवाह संबंध स्थापित नहीं किया गया. हालांकि खुद शाहजहां एक राठौड़ राजकुमारी का बेटा था. पूर्व बने संबंधों के आधार पर शाहजहां ने भी अग्रणी राजपूत घरानों जोधपुर और आमेर के शासकों को भारी सम्मान दिया.

राजस्थान के जाने-माने इतिहासकार डॉ. आरएस खंगारोत ने बताया कि मध्यकाल में हुई इन शादियों को किसी हिंदू राजा या राजपूत राजकुमारियों के मुसलमान शासक से विवाह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. दो शासकों के बीच अच्छे संबंध कायम हो जाएं इसलिए ये मैट्रीमोनियल एलाइंस (वैवाहिक गठजोड़) होते थे. खंगारोत ने रानी पद्मनी पर बन रही फिल्म 'पद्मावती' पर हुए विवाद को भी इतिहास के साथ छेड़छाड़ वाला बताया. (नोट- इस खबर में उल्लेखित सभी विवाह संबंधों का जिक्र ख्यात इतिहासकारों ने अपनी मध्यकालिन भारत के इतिहास की रचनाओं में किया है. संबंधित तथ्य के लिए उन्हीं संदर्भ पुस्तकों का उल्लेख किया गयाहै. न्यूज18 इतिहासकारों के दावों की पुष्टि नहीं करता है.) परन्तु चिंतन करने पर मजबूर ज़रूर करता है , यदि भारतीय राजाओं के ऐसे स्वार्थी सम्बंध उन लुटेरों मुग़लों से नहीं होते तो क्या भारत सैकड़ों वर्षों तक अपरिचित विधर्मियो के हँथो ग़ुलाम रहता,

मुग़लों के भय से जिन राजाओं ने अपनी बेटियाँ इन्हें सौंप दी यदि सभी संगठित होकर मुग़लों से  संघर्ष करते तो अपना देश , अपनी सम्पत्ति , अपनी आबरू ,अपने गौरवशाली इतिहास की मर्यादा को बचाया जा सकता था , कल से सीखो - कल को बचाओ , प्रीति के पुजारी हिंदुओ प्यार करो, प्यार करो , बस प्यार करो, स्वाभिमानी, देशभक्त और ज़िन्दा हिन्दू, जागो रे जागो



         आपका
देवेन्द्र पाण्डेय "डब्बू जी "