गुरुवार, 5 मई 2022

       सच में ब्रम्मण बड़े निरदई ,स्वार्थी ,और लोभी थे आज का समाज यही सोचता है....... ?

मैं भी पहले यही सोचता था फिर अध्ययन किया, मैंने उन ब्रम्मण बिरोधी नेताओ की जीवनी भी पढ़ी जिनकी योग्यता का आधार ब्रम्मण थे

सुदामा ने दलिद्रता के लिए श्रापित श्री कृष्ण के हिस्से के चने भी इस लिए खा लिए थे की उमके मित्र श्री कृष्ण को दलिद्रता ना घेरे ! मित्र के हिस्से की दलिद्रता को वरण करने बाले मित्र और मित्रता की परिभाषा मूर्खों के समझ में नहीं आइ !

पशुराम जी ने २१ बार विधर्मियो का विनाश किया उनके राज्य जो जीते सब गरिवो को दान में दे दिया स्वयं जंगल में कुटिया बना कर रहते थे ! ये दानवीरता , निर्लोभिता और उदारता समाज को नहीं दिखी !

चाणक्य खुद राजा नहीं बने उन्होने एक गरीब चरवाहे को अपनी योग्यता और कुशल नीति से राजा बना दिया ! ये योग्यता समाज के लिए ऊँच नीच के भेद से कितनी ऊपर थी जिसे समझने  और स्वीकारने का साहस किसी ने नहीं जुटाया !

दधीचि ने अपनी हड्डियाँ मानवता के हितार्थ जीवित तन से अलग कर दान कर दिया ! समाज हित में यह बलिदान किसी को नहीं दिखा !

सावरकर ने शूद्रों को मन्दिरो का पुजारी बनाया , इस सामाजिक एक रूपता की हत्या किसने की , उन मुग़लों और गोरों के षड्यंत्रो को समझने का यत्न क्यों नहीं किया गया !

देश के प्रधानमंत्री अटल विहारी बाजपेयी ने एक वोट के अभाव में अपनी सरकार गिरा दी परंतु अपना चरित्य नहीं गिराया , प्रधानमंत्री नरसिम्हाराओ ने बाबरी के कलंक को ध्वस्त कर राम जन्म भूमि को मुक्त कराया परंतु कभी उन्होंने इस बात का श्रेय नहीं लिया !

वर्ण व्यबस्था का दोषी भी ब्रम्मण है क्यों की ....... ?


उसने समाज की रक्षा के लिए क्षत्री को शक्ति का व्यापारी अर्थात् राजा, और प्रजा पालक बनाया ! ताकि अन्य समुदाय के लोग निर्भिकता से जीवन जी सके ! ये सामाजिक रचना लोगों की सोच से कोषों दूर रही !

वैश्य को बस्तु का व्यापारी बनाया जिस से सहजता से सभी को ज़रूरत की सामग्री मिल सके ,बस्तु विनिमय और मुद्रा विनिमय का सिद्धांत किसी ने नहीं समझा ,मज़बूत आर्थिक समाज की व्यापार नीति किसी को पल्ले नहीं पड़ी !

ब्रम्मण ने ही शूद्र को सेवा सहित बर्तन,चमड़े, खेती के उपकरण व खेती का व्यापारी श्रम का व्यापारी बनाया  ! ता की वेरोज़गारी की समस्या ना हो समाज की व्यवस्था सुचारु रूप से संपनता के साथ चलती रहे ! इसमें भी लोगों ने अच्छाई नहीं निंदा ही ढूँढी !

ब्रम्मण को अपनी योग्यत का अभिमान ना हो अपनी बिलक्षण प्रतिभा पर घमंड ना हो इस लिए उसने भीख माँग कर भोजन करने का संकल्प लिया और शिक्षा का दान देना शुरू किया ! सभी वरणो को व्यापार से जोड़ा खुद शिक्षा का दान करता रहा , भीख माँग कर भी सभी वरणो के कल्याण की कल्पना क्या किसी और ने की है ! ब्रम्मण की देशभक्ति और सामाजिक उत्थान के सिद्धांत को समझने और स्वीकारने की हिम्मत किसी ने नहीं जुटाई !

फिर भी सब की नज़रों में सब से ज़्यादा दोषी,लोभी,स्वार्थी,ब्रम्मण ही निरूपित किया गया , ईमानदारी से वेदों का अध्ययन करने की ज़रूरत है जिसमें सामाजिक मज़बूत व्यवस्था और सभी वरणो का सम्मान है ,इतिहास जिसमें देश को ग़ुलामी से मुक्त करने सब से अधिक बलिदान देने के प्रमाण है और अपने साथ घटित हुई व्यावहारिक घटनाओं का आँकलन ह्रदय में हाथ रख कर करना फिर पूरी ताक़त से उस ब्रम्मण का विरोध करना जिसे आप का ह्रदय धिक्कारे ! 
इस दुनिया ने सामाजिक समरस्ता के ह्रदय को लहू लुहान किया है उसे प्रताड़ित और उपेक्षित किया है फिर भी परशुराम के बंसज ने शास्त्र नहीं उठाए , विदेशी सत्ता के षड्यंत्र कारियों ने भारत में आधिपत्य हेतु ब्रम्मण को निशाना बनाया कर बदनाम किया षड्यंत के दस्तावेज तयार कर सामाजिक शक्ति को जीर्णक्षीरण किया ताकी सहजता से की देश को ग़ुलाम बनाया जासके उनकी यह नीति सफल हुई क्यों की यहाँ के लोगों ने मुग़लों और ब्रिटिशो को स्वीकारा और अपने हित के स्तम्भ को ध्वस्त किया , आज भी सामाजिक समरसता के पट ब्रम्मण ने खोल रखे है जिसे राजनीति और सत्ता लोभियों ने फिर षड्यंत्र पूर्वक बंद करने के प्रयश किए है और कर रहे है , सभी वर्ण चिंतन अर्थात् स्व चिंतन करे , इस समाज और राष्ट्र ने क्या खोया, क्या पाया और क्या बोया है !

दुनिया ग़लत सावित करने की कोशिश करती रहे करने देना , हे विप्र तुम अपने संस्कारो सहित जन कल्याण में जुटे रहना , ईश्वर ने तुम्हें समर्थ दिया है तो ये सव तुम्हें ही सहना ,सुनना और करना है !

मेरा आत्म उद्ग़ार समर्पित है सारे संसार को
इस लेख को जाती में बटकर नहीं सत्यता को आधार बना कर पढ़े ,समझे तो सामाजिक सौहार्द के हित में स्वीकारे

दुनिया के सभी सनातनी बंधुओ को शास्त्र युक्त शस्त्र पूजन के अधिकार अर्थात् भगवान परशुराम जी के प्राकट्य दिवश  की अनंत कोटि शुभकामनाए  !



  आपका
देवेन्द्र पाण्डेय "डब्बू जी "

शुक्रवार, 18 मार्च 2022

भाजपा से अच्छा तो आतंकवादी है

जिसके चेहरे पर नकाब नही है ।

गुलामी छोड़ो, सत्यता को स्वीकार करो,हिंदू अपनी दुर्गति का इतिहास लिखना बंद करो 👇,आतंकी बिट्टा उर्फ फारुख अहमद,अपनी गलती स्वीकार कर सकता है । परंतु भाजपा नही, द कश्मीर फाइल, नामक फिल्म जिसका प्रमोशन प्रधान मंत्री स्वयं कर रहे है, यह फिल्म हिंदुओं की बहादुरी का इतिहास नही बल्कि कायरता एवम दुर्गति के प्रदर्शन का उत्सव है । RSS और BJP के गठन से लेकर आज तक के इतिहास पर नजर डाली जाए तो चौकाने वाले तथ्यों से दिमाग चकरा जायेगा, चाहे देश का बटवारा हो, या हिंदुत्व के नाम पर हिंदुओ का शोषण ।आज सिर्फ चुनिंदा बिंदुओं पर चर्चा करेंगे, इनके इतिहास पर फिर कभी नजर डालेंगे ।
व्ही पी सिंह सरकार जिसमे भाजपा भी शामिल थी। 
दिनांक 2 दिसंबर 1989 से 10 दिसंबर 1990 तक । 19 जनवरी 1990 की बह काली रात जिसका अंधेरा आज तक नही छटा, इस नपुंसक सरकार के कारण ही हिंदू अर्थात देश का मालिक अपने देश में शरणार्थी बना
कश्मीरी हिंदुओं के पलायन पर तत्कालीन भारत सरकार में शामिल भाजपा के 85 सांसद हिंदुओं की हत्या और उनके पलायन पर मौन थे। यदि लालू यादव ने आडवाणी का रथ जिसके सारथी नरेंद्र मोदी थे उसे बिहार में नही रोका होता तो ये कलंकित सरकार बीजेपी के समर्थन से चलती रहती । 23 अक्टूबर को आडवाणी को बिहार में गिरफ्तार कर लिया गया.आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद केंद्र की सियासत में भूचाल मच गया. BJP ने केंद्र में सत्तासीन वीपी सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया, जिसमें लालू प्रसाद यादव भी साझीदार थे, और सरकार गिर गई थी.जिस रात हिंदुओ का कत्ल उनकी बच्चियों से बलात्कार हो रहा था और हिंदू अपनी संपत्ति,अपना परिवार,अपना घर सब कुछ छोड़कर जान बचाने रोते बिलखते भाग रहे थे उसी रात भाजपा के कृपा पात्र नेता जिन्हे जम्मू कश्मीर का राज्यपाल बनाया गया था,राज्यपाल जगमोहन हिंदुओं के कत्ल और पलायन से वेखवर जम्मू में सभी सेना के प्रमुख अधिकारियों के साथ स्वयं के राज्यपाल बनाने का उत्सव मना रहे थे । कश्मीर  से 7 लाख़ हिंदुओ का पलायन शायद पाकिस्तान भारत के बटबारे के बाद ये सब से दुखद घटना थी ।
कश्मीर में हिंदुओं को मारा-भगाया गया।सत्ता में BJP थी।
देश का गृह मंत्री मुसलमान बना मुफ्ती मोहम्मद सईद जिसने भारत की तबाही में शामिल आतंकियों को छोड़ा,समर्थन बीजेपी का था । देश का गृहमंत्री, प्रधानमंत्री के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण और ताकतवर व्यक्ति होता है। लेकिन हमारे देश के इतिहास में एक ऐसी घटना भी दर्ज है जब गृहमंत्री की बेटी का अपहरण हो गया था। 1989 में मुफ्ती मोहम्मद सईद देश के केंद्रीय गृहमंत्री थे और उनकी बेटी रूबैया सैयद को आतंकवादियों ने अगवा कर लिया था। हालांकि धीमी कानूनी प्रक्रिया और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के चलते इस अपहरण में शामिल और इसे अंजाम देने वालों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। घटना के तीन दशक बाद स्पेशल टाडा कोर्ट में 24 में से 10 आरोपियों पर चार्जशीट दाखिल हो सकी। दो आरोपी मारे जा चुके हैं और 12 कभी पकड़ में आए ही नहीं। मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी के बदले भारत सरकार को पांच आतंकवादियों को छोड़ना पड़ा था। 13 दिसंबर की दोपहर तक सरकार और अपहरणकर्ताओं के बीच समझौता हो गया. समझौते के तहत 5 आतंकवादियों को रिहा किया गया. बदले में कुछ ही घंटे बाद लगभग साढ़े सात बजे रूबिया को सोनवर में जस्टिस मोतीलाल भट्ट के घर सुरक्षित पहुंचा दिया गया. रुबिया करीब 122 घंटे बाद रिहा हुई थीं. 13 दिसंबर की रात करीब 12 बजे विशेष विमान से रूबिया को दिल्ली लाया गया. हवाई अड्डे पर पिता मिले, अर्थात हिंदुओं के कत्ल से पहले भाजपा नेताओं और भारत सरकार की कायरता को आतंकियों ने खूब अच्छी तरह जांच परख लिया था ।
गोधरा में 58 हिन्दू जला दिए गए। सत्ता BJP की थी।
27 फरवरी, 2002 को गुजरात के गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस एक कोच एस 6 में आग लगा दी गई थी. इस कोच में यात्रा कर रहे 59 यात्रियों की जलकर मौत हो गई थी. मरने वालों में 27 महिलाएं और 10 बच्चे थे. इसके अलावा 48 यात्री घायल हुए थे.
संसद पर हमला हुआ सत्ता BJP की थी।
13 दिसंबर 2001 सांसद भवन जो भारत के प्रजातंत्र का मंदिर और सब से सुरक्षित माना जाता है जहा आम जनता का प्रवेश भी आसानी से संभव नहीं,बहा लश्कर ए तायवा और जैश ए मोहम्मद नमक आतंकी संगठन ने हमला किया इस हमले में 14 लोगो की जान गई थी , उस समय भारत के प्रधान मंत्री अटल बिहारी बाजपेई थे। इस हमले से यह सिद्ध होगया की भारत में कोई व्यक्ति और कोई जगह अब सुरक्षित नही रही ।
कारगिल घुसपैठ ,सत्ता BJP की थी।
इस युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की दिलेरी की दास्‍तां आज भी देशवासियों की जुबान पर है। पाकिस्‍तानी सैनिक मई 1999 में करगिल सेक्‍टर में घुसपैठियों की शक्‍ल में घुसे और नियंत्रण रेखा पार कर हमारी कई चोटियों पर कब्‍जा कर लिया। दुश्‍मन की इस नापाक हरकत का जवाब देने के लिए आर्मी ने 'ऑपरेशन विजय' शुरू किया, जिसमें 30,000 भारतीय सैनिक शामिल थे। एयरफोर्स ने आर्मी को सपोर्ट करने के लिए 26 मई को 'ऑपरेशन सफेद सागर' शुरू किया, जबकि नौसेना ने कराची तक पहुंचने वाले समुद्री मार्ग से सप्लाई रोकने के लिए अपने पूर्वी इलाकों के जहाजी बेड़े को अरब सागर में ला खड़ा किया। 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने करगिल को पाकिस्‍तानी सैनिकों के कब्‍जे से पूरी तरह मुक्‍त करा लिया। इसके बाद से हर साल 26 जुलाई को 'करगिल विजय दिवस' के रूप में मनाया जाता है।इस लड़ाई में दोनों देशों की सेना को नुकसान हुआ था। शुरु में पाकिस्‍तान ने दावा किया उसके 375 सैनिक मारे गए हैं लेकिन बाद में सामने आया कि करीब चार हजार पाकिस्‍तानी करगिल जंग में मारे गए हैं। भारतीय सेना के मुताबिक 543 अफसर और जवान शहीद हुए जबकि करीब 1300 जख्‍मी हुए। महज एक भारतीय सैनिक को युद्धबंदी बनाया गया था।
पुलवामा आतंकी हमले ,सत्ता BJP की थी।
देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी थे सेना के अत्यन्त गोपनीय अभियान की सूचना आतंकियों को कैसे लगी यह आज भी चिंता का और खोज का विषय है । 14 फरवरी 2019 को, जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारतीय सुरक्षा कर्मियों को ले जाने वाले सी०आर०पी०एफ० के वाहनों के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ, जिसमें 45 भारतीय सुरक्षा कर्मियों की जान गयी थी। यह हमला जम्मू और कश्मीर के पुलवामा ज़िले के अवन्तिपोरा के निकट लेथपोरा इलाके में हुआ था।
जम्मू-कश्मीर में साल 2015 में बीजेपी-पीडीपी गठबंधन की सरकार बनी थी.
जिस मुफ्ती परिवार से देश ने धोखा खाया आतंकियों को जिसने संरक्षण दिया उसी पीडीपी से मिल कर भाजपा ने 1 मार्च 2015 में जम्मू कश्मीर में गठबंधन की सरकार बनाई, भाजपा के समर्थन से मुफ्ती मोहम्मद सईद मुख्य मंत्री बने और भाजपा ने अपना उप मुख्यमंत्री बनाया,7 जनवरी 2016 को मुफ्ती मोहम्मद सईद की मौत हो जाने पर भाजपा ने उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती को जम्मू कश्मीर की प्रथम महिला मुख्यमंत्री बनाया और अपने नेता निर्मल सिंह को उप मुख्यमंत्री के पद पर बैठाया ।
शाहीन बाग आंदोलन पूरी राजधानी में हंगामा,
पूरे भारत में मुसलमानो का संगठित प्रदर्शन सरकार मोदी की थी ।
दिल्ली दंगा,हिंदुओ की हत्या हुई , हथियारी के जाखिरी ,पेट्रोल बम, सहित मुल्लो ने नंगा नाच नाचा,
मुसलमानो की दहशत से पूरी दिल्ली दहल उठी ।
एक साल तक किसान आंदोलन,तानाशाह सरकार ने उत्तर प्रदेश चुनाव के कारण आखिर किसान कानून वापस लिया लेकिन हजारों किसानों की मौत के बाद ये कारनामा भी बीजेपी सरकार का था ।
हिंदू तुम्हे चिंतन करना ही होगा,जागना होगा और अपने अस्तित्व का संघर्ष भी खुद ही करना होगा ।
जो देश में रह कर देश को बरबाद करने में लिप्त है, जो राजनैतिक पार्टियां हिंदुत्व को मिटाने में लगी है, जो उदंड विधर्मी हिंदुओ के साथ अत्याचार कर रहे है वो चिन्हित है उन्हे देश पहचान चुका है लेकिन जो कंधे पर हाथ रखकर गले में छुरी चलते है उनसे सावधान रहने की ज्यादा जरूरत है,बहुरूपिए किसी के नहीं ये सिर्फ स्वार्थ में लिप्त सत्ता लोभियों का गिरोह है । BJP, RSS हिंदुओ की दुर्गति के प्रदर्शन पर जश्न मनाते है और अपनी विफलता पर माफी नहीं वोट माँगती है। हिंदू क्या तुम्हे नही लगता की अपनी दुर्गति के जुम्मेदार तुम स्वयं हो। यदि देश,धर्म,मर्यादा,संस्कृति,संस्कार सहित स्वयं को बचाना है तो सिर्फ अखिल भारत हिंदू महासभा के साथ खड़े हो क्यों की हिंदू महासभा सिर्फ प्रखर हिंदुत्व की स्पष्ट बात और खुल कर दमदारी से हिंदुओं के साथ है ।
जय हिन्दू राष्ट्र
      आपका

देवेन्द्र पाण्डेय "डब्बू जी "

गुरुवार, 13 जनवरी 2022

        "सत्यमेव जयते"

जिस आदमी ने श्रीमदभगवद गीता का पहला उर्दू अनुवाद किया
वो था मोहम्मद मेहरुल्लाह! बाद में उसने सनातन धर्म अपना लिया!

पहला व्यक्ति जिसने श्रीमदभागवद गीता का अरबी अनुवाद किया वो एक फिलिस्तीनी था
अल फतेह कमांडो नाम का! जिसने बाद में जर्मनी में इस्कॉन जॉइन किया और अब हिंदुत्व में है!

पहला व्यक्ति जिसने इंग्लिश अनुवाद किया उसका नाम चार्ल्स विलिक्नोस था!
उसने भी बाद में हिन्दू धर्म अपना लिया उसका तो ये तक कहना था कि दुनिया मे केवल हिंदुत्व बचेगा!

हिब्रू में अनुवाद करने वाला व्यक्ति Bezashition le fanah नाम का इसरायली था
जिसने बाद में हिंदुत्व अपना लिया था भारत मे आकर!

पहला व्यक्ति जिसने रूसी भाषा मे अनुवाद किया उसका नाम था 
नोविकोव जो बाद में भगवान कृष्ण का भक्त बन गया था!

आज तक 283 बुद्धिमानों ने श्रीमद भगवद गीता का अनुवाद किया है अलग अलग भाषाओं में जिनमें से 58 बंगाली, 44 अंग्रेजी, 12 जर्मन, 4 रूसी, 4 फ्रेंच, 13 स्पेनिश, 5 अरबी, 3 उर्दू और अन्य कई भाषाएं थी ओर इन सब मे दिलचस्प बात यह है कि इन सभी ने बाद मैं हिन्दू धर्म को अपना लिया था।

जिस व्यक्ति ने कुरान को बंगाली में अनुवाद किया उसका नाम गिरीश चंद्र सेन था! 
लेकिन वो इस्लाम मे नहीं गया शायद इसलिए कि वो इस अनुवाद करने से पहले 
श्रीमद भागवद गीता को भी पढ़ चुके थे !

ये है सनातन धर्म और इसके धार्मिक ग्रंथों की ताकत।

और हम हिन्दू इन्हें ख़ुद ही नही पढ़ते है, है ना अजीब विडम्बना ??

भटके हुए रही को मंजिल मिल हि जाती है,
गुमराह तो वो है जो घरों से निकलते ही नही ।

लौट आओ भटके हुए मुसाफिरो अभी मौका है
सनातन सत्य है बाक़ी सब धोखा है ।


 आपका
देवेन्द्र पाण्डेय "डब्बू जी "

शुक्रवार, 7 जनवरी 2022

       भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह क्यों लगाते है....?
क्या प्रधानमंत्री जी के सुरक्षा कमांडो भरोसे के नही रहे, क्या देश के गृहमंत्री अमित शाह जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में कटौती की, आखिर दुनिया के सब से बेहतरीन कमांडो जो विदेश से भी किसी संकट के समय प्रधानमंत्री को सुरक्षित निकालने की छमता रखते है उन की छमता पर प्रश्नचिन्ह क्यों....? 
प्रधानमंत्री जी का बयान की मैं पंजाब के भटिंडा एयरपोर्ट तक जिंदा लौट आया भारत में प्रांत बाद सहित गृह युद्ध को भड़काने जैसा है,
पूरी दुनिया के सामने अपने सुरक्षा कमांडो को कमजोर साबित करने का कारण क्या है ये तो प्रधानमंत्री ही जाने लेकिन विश्व पटल पर जो छवि भारत के सेना और कमांडो की रही है मोदी साहब ने उसे धूमिल किया है ।
100 कमांडो प्रधानमंत्री के साथ चलते है और घर की सुरक्षा में 500 से अधिक कमांडो तैनात रहते है, एक मिनट में 850 राउंड फायर करने बाली राइफल से लैस ये कमांडो जो सिर्फ प्रधानमंत्री की सुरक्षा हेतु ही तैनात रहते है, प्रधानमंत्री के काफिले में दो बख्तरबंद BMW 7 सीरीज सेडान ,  6 BMW X 5 और एक मार्सिडीज बेंज, एंबुलेंस सहित अन्य एक दर्जन से अधिक वाहन साथ रहते है, प्रधानमंत्री जी की गाड़ी पूरी तरह बुलेटप्रूफ होती है, हाल ही में प्रधानमंत्री जी के काफिले में एक नई गाड़ी और शामिल हुई  Mercedes - Maybach S 650 Guard । प्रधानमंत्री जी के काफिले में वर्तमान समय में BMW -7 सीरीज हाई सिक्यूरिटी एडिशन, लैंड रोवर रेंज रोवर वोग और टोयोटा लैंड क्रूजर जैसी गाड़िया शामिल है । प्रधानमंत्री के काफिले में प्रधानमंत्री जी के साथ दो डमी गाड़िया भी चलती है, जिससे प्रधानमंत्री किस गाड़ी में है चिन्हित करना आसान नहीं होता । प्रधानमंत्री की गाड़ी में किसी ग्रेनेड और एके 47 जैसी गन का कोई असर नहीं होता, यहा तक की प्रधानमंत्री की गाड़ी का कांच भी किसी ग्रेनेड और गन से नही तोड़ा जा सकता,  प्रधानमंत्री की गाड़ी का टायर फट जाए तब भी 90 किलो मीटर की रफ्तार से 320 किलो मीटर तक भगा जा सकता है ।
मोदी जो बोले केवल बही सही.....?
देश के प्रधान मंत्री SPG के घेरे में रहते है, जिसका एक दिन का खर्चा 1करोड 62 लाख रूपए है ।
MNF 2000 असाल्ट राइफल, ऑटोमैटिक गन और 17 M रिवाल्वर जैसे अत्याधुनिक हथियार से ये जवान पूरी तरह लैश होते है , प्रधान मंत्री जी के 4 सुरक्षा घेरे होते है, पहले सुरक्षा घेरे में SPG, फिर ASL, फिर राज्य पुलिस बल और ASL अर्थात एडवांस सिक्योरिटी संपर्क टीम तैनात रहती है, प्रधान मंत्री के काफिले में एक जैमर बाली गाड़ी चलती है जिसके कारण 100 मीटर की परिधि में रेडियो अथवा रिमोट कंट्रोल से होने वाले विस्फोट को रोक देती है  इस गाड़ी के कारण IED मे विस्फोट नही होने देता । फिर मैं जिंदा हूं जैसा डायलाग क्यों ।
मोदी साहब कैसे और कितना भरोसा करे आप पर.....?
पंजाब के फिरोजपुर ने मोदी साहब की सभा,रैली इस लिए रद्द हुई की जनता मोदी को सुनने नही आई, प्रधानमंत्री जी इस बात से दुखी होकर अपने निर्धारित मार्ग को छोड़ अघोषित सड़क मार्ग से भ्रमण पर निकल पड़ते है, जिस कारण सभा रैली स्थल पर तैनात सुरक्षा बल की उपयोगिता समाप्त हो जाती है और नई जगह पर अचानक शायद सुरक्षा बल तैनात इस लिए नही किया जा सकता था क्यों की रोड से जाने का निर्धारण अचानक मोदी साहब ने किया, प्रश्न उठता है आखिर ऐसा क्यों......?  फिर मैं जिंदा हूं का डायलाग क्यों.....?
जो मोदी पाकिस्तान बिना किसी प्रोटोकॉल के पहुंच कर नवाज शरीफ के मां को शाल और बेटी को सूट भेट कर आते हैं, जिनकी बहादुरी के किस्से दुनिया के हर बच्चे को मीडिया द्वारा सुनाया जाता है, वो प्रधानमंत्री, जिसकी सुरक्षा में केंद्रीय सुरक्षा बल लगा हो, जिसकी सुरक्षा में दुनिया के सब से ताकतवर सुरक्षा कर्मियों तैनात हो, जिसकी सुरक्षा में 10 हजार पंजाब पुलिस कर्मी तैनात हों उस प्रधान मंत्री का काफिला 15
मिनट के लिए खुद के देश में किसानों के द्वारा लगाए गए जाम में फंस जाता है , सुरक्षा कर्मियों और किसानों को बीच किसी तरह की झड़प और संवाद भी नही होता तब प्रधानमंत्री जी कहते है पंजाब के मुख्यमंत्री का धन्यवाद की मैं जिंदा हूं, यह मोदी जी का व्यंग है या चुनावी जुमला जो हर चुनाव के पहले वह छोड़ते हैं , यदि घटना गंभीर है तो परिणाम को घटित करने के साजिश कर्ताओं पर कठोर कार्यवाही होनी ही चाहिए वरना प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी के चुनावी चमत्कार और जुमलो को अब जनता पहचानने लगी है । सभा में खाली कुर्सी तो चुनावी पैंतरा, कहानी,डायलाग और रास्ता भी बदल गया,
प्रधान मंत्री की हत्या जिसे करना था उसने इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की कर दी हत्यारे प्रपोगण्डा नही करते , इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए नरसंघार की पुनः पृष्ठ भूमि कौन लिख रहा है यह चिंतन की बात है ।
प्रधानमंत्री जी के साथ पूरा देश है लेकिन, किसी राजनैतिक जुमले की शिकार जनता हो यह उचित नही । मोदी है तो ही मुमकिन है , यदि अपने देश में अपनो से और अपने सुरक्षा कर्मियों से सभी सुरक्षा एजेंसियों से मोदी जी को खतरा है तो उनको घर के बाहर नही निकलना चाहिए, देश के ग्रहमंत्री अमित शाह जी को सुरक्षा के फेलुअर पर जवाब देना चाहिए, खुपिया एजेंसियों को नीद से जगाना चाहिए ,
भारत विशाल देश है इसकी मर्यादा है इसे नीतिगत तरीके से चलने की जरूरत है, देश जुमलो और जबर्दस्ती से नही चलता, मोदी जी चिंतन करे और देश की जनता को भी चिंतन करने दे ।

 आपका
देवेन्द्र पाण्डेय "डब्बू जी "

शनिवार, 1 जनवरी 2022

किसी का बाप और पाप हमे स्वीकार नही
तुम जी भर पूजो गांधी जिन्ना
हम गोडसे के पथ गामी है
हमको गोडसे ही रहने दो

मेरा अखिल,अखंड,अजेय भारत मुझे लौटा दो
मेरा सत्य,सनातन युक्त हिंदू राष्ट्र मुझे लौटा दो

15 साल की उम्र में वेश्या की चोखट से हिम्मत न जुटा पाने के कारण वापस लौट आये।

16 साल की उम्र में पत्नी से सम्भोग की इच्छा से मुक्त नहीं हो पाए जब उनके पिता मृत्यु शैया पर थे।

21 साल की उम्र में फिर उनका मन पराई स्त्री को देखकर विकारग्रस्त होता है।

28 साल की उम्र में हब्सी स्त्री के पास जाते है लेकिन शर्मसार होकर वापिस आ जाते है।

31 साल की उम्र में 1 बच्चे के पिता बन जाते है।

40 साल की उम्र में अपने दोस्त हेनरी पोलक की पत्नी के साथ आत्मीयता महसूस करते है।

41 साल की उम्र में मोड नाम की लड़की से प्रभवित होते है।

48 की उम्र में 22 साल की एस्थर फेरिंग के मोहजाल में फंस जाते है।

51 की उम्र में 48 साल की सरला देवी चोधरानी के प्रेम में पड़ते हैं।

56 की उम्र में 33 साल की मेडलिन स्लेड के प्रेम में फंसते है।

60 की उम्र में 18 साल की महाराष्ट्रियन प्रेमा के माया जाल में फंस जाते है।

64 की उम्र में 24 साल की अमेरिका की नीला नागिनी के संपर्क में आते हैं।

65 की उम्र में 37 साल की जर्मन महिला मार्गरेट स्पीगल को कपडे पहनना सिखाते हैं।

69 की उम्र में 18 साल की डॉक्टर शुशीला नैयरसे नग्न होकर मालिश करवाते हैं।

72 की उम्र में बाल विधवा लीलावती आसर, पटियाला के बड़े जमींदार की बेटी अम्तुस्स्लाम , कपूरथला खानदान की राजकुमारी अमृत कौर तथा मशहूर समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण की पत्नी प्रभावती जैसी महिलाओ के साथ सोते  हैं।

76 की उम्र में 16 साल की आभा वीणा और कंचन नाम की युवतियों को नग्न होने को कहते हैं  जिस पर ये लडकिया कहती है की उन्हें ब्रह्मचर्य के बजाय सम्भोग की जरूरत है।

77 की उम्र मे मनु के साथ नोआखाली की सर्द रातें शरीर को गर्म रखने के लिए नग्न सोकर गुजारते हैं और 79 के अंतिम क्षणों तक आभा और मनु के साथ एक साथ बिस्तर पर सोते हैं।

ऐसे थे कांग्रेस के महान "बापू मोहनदास गाँधी"।
होश सँभालने के बाद और आखिरी दम तक महिलाओं में ही लगे रहे, और इन्होने आज़ाद करवाया भारत को? वो भी बिना खडग बिना ढाल?

गंदगी तो दुनिया में बहुत है दुःख इस बात का नहीं, दुःख तो इस बात का है कि इस गंदगी को कांग्रेस ने भारत का राष्ट्रपिता घोषित कर दिया। दुर्भाग्य की बात यह है कि कांग्रेस से लेकर सब इनके मिथ्या प्रचार और जय जयकार में लगे हैं।

ये है हमारे तथाकथित राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद्र गांधी की जीवनी जो खुद ने लिखी थी।

जिसको शक हो तो गूगल और इतिहास की किताबों से सम्पर्क करें।

Congress का क्या है,  बोस को bhagoda , war criminal घोषित कर रखा था,  Bhagat sing chandr Shekhar azad को atankvadi

बँटवारे के बाद लगभग पंद्रह साल तक मुसलमान भारत से पाकिस्तान और पाकिस्तान से भारत आते जाते रहे । बहुत से लोग तो बरसों तक तय नहीं कर पा रहे थे कि यहाँ रहें या वहाँ रहें । हमारे एक सहपाठी थे उनकी महत्वाकांक्षा थी कि वह एयर फोर्स में पायलट बनेंगे , अगर भारत में चयन नहीं हुआ तो पाकिस्तान चले जायेंगे , उनके परिवार के बहुत से लोग पाकिस्तान में बस गये थे । मुसलमानों के दोनों हाथ में लड्डू थे । हमारे बरेली के हाशम सुर्मे वाले बताते हैं कि उनके दो ताया कराची चले गये और वहाँ बरेली का मशहूर सुर्मा बेच रहे हैं बचे दो भाई बरेली का कारोबार संभाले हुए हैं । यूनानी दवायें बनानी वाली हमदर्द भी आधी हिंदुस्तान में रह गई आधी पाकिस्तान चली गई और वहाँ भी रूह अफ़्ज़ा पिला रही है ।

साहिर लुधियानवी का पाकिस्तान में वारंट कटा तो रातोरात भारत भाग आये , कुर्रतुल ऐन हैदर भारत से पाकिस्तान गईं थीं जहाँ उन्होंने उर्दू का अमर उपन्यास आग का दरिया लिखा जो लाहौर से छपा । यह उपन्यास प्राचीन भारत से बँटवारे तक के इतिहास के समेटते हुये भारत की संस्कृति को महिमा मंडित करता था जो पाकिस्तानी मुल्लाओं को बर्दाश्त नहीं हुआ और क़ुर्रतुल ऐन हैदर को इतनी धमकियाँ मिलीं कि वह सन ५९ में भारत वापस आ गईं और संयोग से उसी बरस जोश मलीहाबादी पाकिस्तान के लिये हिजरत कर गये । जोश की आत्मकथा यादों की बारात में वह अपने इस निर्णय के लिये पछताते दीख रहे हैं । बड़े गुलाम अली खाँ भी इसी तरह भारत वापस आ गये ।

श्रीकृष्ण ने कहा है कि, धर्म-अधर्म के बीच में यदि आप  , तटस्थ रहते हैं,  तो आप अधर्म का साथ देते हैं

भीम ने गदा युद्ध के नियम तोड़ते हुए दुर्योधन को कमर के नीचे मारा
ये देख बलराम बीच में आए और भीम की हत्या करने की ठान ली।

तब श्रीकृष्ण ने अपने भाई बलराम से कहा.

आपको कोई अधिकार नहीं है इस युद्ध में बोलने का क्योंकि आप न्यूट्रल रहना चाहते थे ताकि आपको न कौरवों का, न पांडवों का साथ देना पड़े। इसलिए आप चुपचाप तीर्थ यात्रा का बहाना करके निकल लिए।

(१) भीम को दुर्योधन ने विष दिया तब आप न्यूट्रल रहे,
(२) पांडवो को लाक्षागृह में जलाने का प्रयास किया गया, तब आप न्यूट्रल रहे,
(३) द्यूत क्रीड़ा में छल किया गया तब आप न्यूट्रल रहे,
(४) द्रौपदी का वस्त्रहरण किया आप न्यूट्रल रहे,
(५) अभिमन्यु की सारे युद्ध नियम तोड़ कर हत्या की गयी, तब भी आप न्यूट्रल रहे!

आपने न्यूट्रल रह कर, मौन रह कर, दुर्योधन के हर अधर्म का साथ ही दिया! अब आपको कोई अधिकार नहीं है कि आप कुछ बोलें।

क्योंकि धर्म-अधर्म के युद्ध में अगर आप न्यूट्रल रहते हैं तो आप भी अधर्म का साथ दे रहे हैं...

आज हमारा ये देश 712 ई. से धर्म युद्ध लड़ रहा है और हर नागरिक इसमें एक सैनिक है!

साभार सोसल मीडिया

मेरे चरित्र पर जो गांधी वध के खूनी छीटे है
देश हित में हमको हत्यारा रहने दो हम गोडसे ही अच्छे है ।
    आपका
देवेन्द्र पाण्डेय "डब्बू जी "

शनिवार, 2 मई 2020

       सारे कश्मीरी पंडितों के घर के दरवाजों पर नोट लगा दिया जिसमें लिखा था - "या तो मुस्लिम बन जाओ या मरने के लिए तैयार हो जाओ या फिर कश्मीर छोड़कर भाग जाओ लेकिन.. अपनी औरतों को यहीं छोड़कर "। विस्थापित जीवन जी रहे कश्मीरी  उस मंजर को याद करते हुए आज भी सिहर जाते हैं।
वह कहते हैं कि "मस्जिदों के लाउडस्पीकर" लगातार तीन दिन तक यही आवाज दे रहे थे कि यहां क्या चलेगा, "निजाम-ए-मुस्तफा", 'आजादी का मतलब क्या "ला इलाहा इलल्लाह", 'कश्मीर में अगर रहना है, "अल्लाह-ओ-अकबर" कहना है।
और 'असि गच्ची पाकिस्तान, बताओ "रोअस ते बतानेव सान" जिसका मतलब था कि हमें यहां अपना पाकिस्तान बनाना है, कश्मीरी पंडितों के बिना मगर कश्मीरी पंडित महिलाओं के साथ।
सदियों का भाईचारा कुछ ही समय में समाप्त हो गया जहाँ पंडितों से ही तालीम हासिल किए लोग उनकी ही महिलाओं की अस्मत लूटने को तैयार हो गए थे।
सारे कश्मीर की मस्जिदों में एक टेप चलाया गया। जिसमें मुस्लिमों को कहा गया की वो हिन्दुओं को कश्मीर से निकाल बाहर करें। उसके बाद कश्मीरी मुस्लिम सड़कों पर उतर आये।
उन्होंने कश्मीरी पंडितों के घरों को जला दिया, कश्मीर पंडित महिलाओ का बलात्कार करके, फिर उनकी हत्या करके उनके "नग्न शरीर को पेड़ पर लटका दिया गया"।
कुछ महिलाओं को बलात्कार कर जिन्दा जला दिया गया और बाकियों को लोहे के गरम सलाखों से दाग-दाग कर मार दिया गया।
कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्टजो श्रीनगर के सौर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में काम करती थी, का सामूहिक बलात्कार किया गया और फिर हाथों और लातों से पीट-पीट कर उसकी हत्या कर दी गयी।
कुछ वर्षों से कुछ महीनों तक की उम्र के बच्चों को उनकी माँओं के सामने स्टील के तार से पेड़ों पर लटका फाँसी दे कर मार दिया गया।
कश्मीरी काफिर महिलाएँ पहाड़ों की गहरी घाटियों और भागने का रास्ता न मिलने पर ऊंचे मकानों की छतों से कूद कूद कर जान देने लगी।
लेखक राहुल पंडिता उस समय 14 वर्ष के थे। बाहर माहौल ख़राब था। मस्जिदों से उनके ख़िलाफ़ नारे लग रहे थे। पीढ़ियों से उनके भाईचारे से रह रहे पड़ोसी ही कह रहे थे, 'मुसलमान बनकर आज़ादी की लड़ाई में शामिल हो या वादी छोड़कर भागो'।
 पंडितो  के परिवार ने तीन महीने इस उम्मीद में काटे कि शायद माहौल सुधर जाए। "कुछ लड़के जिनके साथ हम बचपन से क्रिकेट खेला करते थे वही हमारे घर के बाहर पंडितों के ख़ाली घरों को आपस में बांटने की बातें कर रहे थे और हमारी लड़कियों के बारे में गंदी बातें कह रहे थे। ये बातें  ज़हन में अब भी ताज़ा हैं।
1989 में कश्मीर में जिहाद के लिए गठित जमात-ए-इस्लामी संगठन का नारा था- 'हम सब एक, तुम भागो या मरो'।
घाटी में कई कश्मीरी पंडितों की बस्तियों में सामूहिक बलात्कार और लड़कियों के अपहरण किए गए। हालात और बदतर हो गए थे।
कुल मिलाकर हजारों की संख्या में काफिर महिलाओं का बलात्कार किया गया.. पच्चास-पच्चास मुस्लिमों द्वारा..
उनके पिताओं.. उनके भाइयों.. पतियों के सामने !!
आज आप जिस तरह दाँत निकालकर धरती के जन्नत कश्मीर घूमकर मजे लेने जाते हैं और वहाँ के लोगों को रोजगार देने जाते हैं। उसी कश्मीर की हसीन वादियों में आज भी सैकड़ों कश्मीरी हिन्दू बेटियों की बेबस कराहें गूंजती हैं, जिन्हें केवल इसलिए नोच-नोच कर खा लिया गया कि वे हिन्दू थीं।
घर, बाजार, हाट, मैदान से लेकर उन खूबसूरत वादियों में न जाने कितनी जुल्मों की दास्तानें दफन हैं जो आज तक अनकही हैं। घाटी के खाली, जले मकान यह चीख-चीख के बताते हैं कि रातों-रात दुनिया जल जाने का मतलब कोई हमसे पूछे कि धूप-दीप और हवन से सुवासित होने वाले दीवारो-दर आज बकरीद के खून के छींटों से दगे पड़े हैं। झेलम और वितस्ता का बहता हुआ पानी उन रातों की वहशियत के गवाह हैं जिसने कभी न खत्म होने वाले दाग इंसानियत के दिल पर दिए।
 विस्थापित जीवन जी रहे कश्मीरी पंडितो के चेहरे पर अविश्वास की सैकड़ों लकीरें पीड़ा की शक्ल में अभी भी उभरती हुईं बयान करती हैं कि यदि आतंक के उन दिनों में घाटी की मुस्लिम आबादी ने उनका साथ दिया होता जब उन्हें वहां से खदेड़ा जा रहा था, उनके साथ कत्लेआम हो रहा था तो किसी भी आतंकवादी में ये हिम्मत नहीं होती कि वह किसी कश्मीरी पंडित को चोट पहुंचाने की सोच पाता लेकिन तब उन्होंने हमारा साथ देने के बजाय कट्टरपंथियों को अपने कंधों पर बिठाया और उनके ही लश्कर में शामिल हो दसियों साल से "गंगा-जमुनी तहजीब" के नशे में डूबे हिन्दुओं को जी भर-भर लूटा !!
अभी हाल में ही आपलोगों ने टीवी पर "अबू बकर अल बगदादी" के जेहादियों को काफिर "यजीदी महिलाओं" को रस्सियों से बाँधकर कौड़ियों के भाव बेचते देखा होगा।
पाकिस्तान में बकरियों की तरह खुलेआम हिन्दू लड़कियों का अपहरण कर सार्वजनिक रूप से मौलवियों की टीम द्वारा धर्मपरिवर्तन कर निकाह कराते देखा होगा। बांग्लादेश से भारत भागकर आये हिन्दुओं के मुँह से महिलाओं के बलात्कार की हजारों मार्मिक घटनाएँ सुनी होंगी।
यहाँ तक कि म्यांमार में भी एक काफिर बौद्ध महिला के बलात्कार और हत्या के बाद शुरू हुई हिंसा के भीषण दौर को देखा होगा।
केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में आदम हवस से बजबजाती इस घिनौनी सोच ने मोरक्को से ले कर हिन्दुस्तान तक सभी देशों पर आक्रमण कर वहाँ के निवासियों को धर्मान्तरित किया, संपत्तियों को लूटा तथा इन देशों में पहले से फल फूल रही हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता का विनाश कर दिया। परन्तु पूरी दुनियाँ में इसकी सबसे ज्यादा सजा महिलाओं को ही भुगतनी पड़ी...बलात्कार के रूप में ।
आज सैकड़ों साल की गुलामी के बाद और नराधमों के अनवरत कुसंग के चलते समय बीतने के साथ धीरे-धीरे ये बलात्कार करने की मानसिक बीमारी भारत के पुरुषों में भी फैलने लगी।
जिस देश में कभी नारी जाति शासन करती थीं, सार्वजनिक रूप से शास्त्रार्थ करती थीं, स्वयंवर द्वारा स्वयं अपना वर चुनती थीं, जिन्हें भारत में देवियों के रूप में श्रद्धा से पूजा जाता था आज उसी देश में छोटी-छोटी.. दुधमुंही.. देवी जैसी बच्चियों तक का बलात्कार होने लगा और आज इस मानसिक रोग का ये भयानक रूप हमें देखने को मिल रहा है।
  आपका
देवेन्द्र पाण्डेय "डब्बू जी "

शनिवार, 26 अगस्त 2017

तुमने समोसा खाया क्या हरी लाल चटनी का किस्सा सुना कर लोगो का कास्ट हरने बाले निर्मल बाबा को सरे देश के मिडिया ने ठग साबित करदिया था फिर उसी बाबा से पैसा लेकर मीडिया ने उसे भगवान बताना शुरू करदिया ! कल तक चुनाव में जिस सच्च डेरा की मदद लेकर सरकार बनाने का ताना बाना बना गया बही संत आज अपराधी साबित हुआ इस के पहले संत आसाराम ने भी मोदी जी की बड़ी तारीफ की थी मोदी ने बहोत आशीर्वाद लिया था फिर बही आसाराम जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गया ! जिन लोगो ने भाजपा को जीवन दिया वो सभी जेल गए बाकि के जेल यात्रा की तैयारी चालू है चाहे लाल कृष्ण आडवाणी हो चाहे मुरली मनोहर जोशी चाहे उमाभारती हो या संत राम विलाश वेदांती हो सब के खिलाफ जांच चालू है ! या तो भाजपा को सच्चे और अच्छे लोगो की परख नहीं है या फिर किसी की ताकत और उसकी लोकप्रियता का फायदा उठाकर उसे ख़त्म करदेने के सिद्धांत पर भाजपा निश्कंटक सत्ता करने के फार्मूले पर आगे बढ़ रही है !